वाराणसी में मिनी बिहार कहे जाने वाले सामनेघाट की मारूति नगर कॉलोनी में किराए पर रहने वाले बिजली विभाग के संविदा कर्मचारी अंगद तिवारी पखवारे भर पूर्व छुट्टियों में सपरिवार अपने गांव बिहार के आरा गए थे। मंगलवार दोपहर आरा से लौटे तो नजारा देख सन्न रह गए। मकान का भूतल डूब चुका था और पानी दूसरे मंजिल को छू रही थी। पत्नी सपना तिवारी, तीन बेटियों और एक बेटे के साथ पहुंचे अंगद तिवारी यह जल नजारा देख मायूस हो उठे। पत्नी सपना तिवारी ने रूआंसे होते हुए कहा कि घर में सभी सामान पड़ा हुआ है, बाइक से लेकर अन्य खाद्यान अब तो सब डूब गया होगा। अब हम कहां रहेंगे, कैसे बनाएंगे खाएंगे आदि तमाम तरह की चिंताए व्यक्त करते हुए सपना फूट-फूटकर रोने लगी।
केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार गंगा इस समय खतरे के निशान 71.26 से 54 सेंटीमीटर ऊपर बह रही हैं। अभी और जलस्तर बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। देखें अगली स्लाइड्स...
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मारूति नगर कॉलोनी में डूबा मकान।
- फोटो : अमर उजाला
यह पीड़ा सिर्फ सपना और अंगद के साथ ही कॉलोनी के रहने वाले अन्य कई लोगों ने व्यक्त की। एनडीआरएफ की टीमों ने नाव से मारूति नगर, सत्यम नगर कॉलोनी के पीड़ित परिवारों को लेकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
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लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाती एनडीआरएफ की टीम।
- फोटो : अमर उजाला
सामनेघाट स्थित ज्ञान प्रवाह के पास से अंदर कॉलोनियों में घुसे पानी ने हाहाकार मचा दिया है। आधा दर्जन कॉलोनियां पानी में डूब गईं और लगभग सौ से डेढ़ सौ परिवार फंस गए। इनके राहत बचाव कार्य को लेकर एनडीआरएफ की आधा दर्जन नाव ने बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाया।
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सत्यम नगर कॉलोनी में बच्चा।
- फोटो : अमर उजाला
टेंट में नहीं हो पा रहा गुजारा
वरूणा नदी का जल स्तर जैसे-जैसे बढ़ता जा रहा है, बाढ़ राहत शिविरों में लोगों की संख्या भी बढ़ने लगी है। शिविरों में रहने वालों का आरोप है कि बच्चों को समय से भोजन उपलब्ध नहीं हो रहा है। ढ़ेलवरिया के बड़ा देव मंदिर के पास बने राहत शिविर में टेंट लगाकर 200 लोग रह रहे हैं। बारिश के दौरान उनकी पूरी गृहस्थी का समान भीग रहा है।
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वैष्णव नगर कॉलोनी से सुरक्षित स्थान पर जाते लोग।
- फोटो : अमर उजाला
जिनका आरोप है कि प्रशासन से राशन तो मिल रहा है लेकिन पास में बंद पड़े स्कूल नहीं खुलवाया जा रहा। जिसमें सैकड़ों लो सुरक्षित रह सकते है। उधर सरैया के प्राथमिक विद्यालय से संबंद्ध तीन बूथों में बाढ़ पीड़ितों संख्या बढ़ गई। जिससे लोगों को मिलने वाला भोजन भी समय पर नहीं मिल पा रहा।