वाराणसी में मुढै़ला तिराहा स्थित पंखा फैक्टरी के गोदाम में लगी भीषण आग ने अस्पताल में भर्ती मरीजों की सांसों पर भी संकट खड़ा कर दिया। देखते ही देखते असमान में काले धुएं का ऐसा गुबार उठा कि अस्पताल के वार्डों तक में दृश्यता बेहद कम हो गई। चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल रहा। फैक्टरी के टीनशेड को फाड़कर उठती लपटें और धुएं के गुबार ने हर किसी को सहमा दिया। मेघना अस्पताल के मरीजों और तीमारदारों के कमरे और वार्ड में धुआं भर गया। मरीजों को तुरंत दूसरे वार्ड में शिफ्ट करना पड़ा। तीसरी और दूसरी मंजिल के लोगों को ग्राउंड फ्लोर पर लाया गया।
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पंखा फैक्टरी में लगी आग
- फोटो : अमर उजाला
आग की लपटें जितनी तेजी से उठीं, उससे कहीं ज्यादा तेजी से जहरीला धुआं आसपास के इलाके में फैल गया। फैक्टरी में भारी मात्रा में मौजूद प्लास्टिक प्लास्टिक पंखों के ब्लेड, कॉपर वायर और पैकेजिंग गत्तों के जलने से उठा रासायनिक धुआं सीधे अस्पताल की ओर रुख कर गया। अस्पताल के जनरल वार्ड से लेकर प्राइवेट कमरों तक धुएं की गंध पहुंचते ही मरीजों और तीमारदारों में अफरातफरी जैसी स्थिति बन गई। मरीजों को सांस लेने में भारी तकलीफ का सामना करना पड़ा।
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पंखा फैक्टरी में लगी आग
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जैसे ही धुएं की परत गहरी हुई कई तीमारदार अपने मरीजों को अस्पताल से बाहर सुरक्षित स्थानों पर जाते दिखे। वार्डों में भर्ती मरीजों के परिजनों के चेहरे पर दहशत साफ देखी जा सकती थी। अस्पताल प्रशासन ने एहतियात के तौर पर खिड़कियों को सील करने और तुरंत एग्जॉस्ट फैन चालू करने का प्रयास किया। वहीं, मुढ़ैला तिराहे पर आग देखने वालों की भीड़ और दमकल की गाड़ियों के आवागमन के कारण चांदपुर-रोहनिया मार्ग का एक लेन पूरी तरह जाम हो गया। मंडुवाडीह पुलिस ने रास्ता खाली कराया।
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आग की उठती लपटों ने निकाला सुरक्षा का गुबार
तीमारदार वैभव मिश्रा ने बताया कि ऐसा लगा कि अस्पताल के वार्ड में ही धुआं भर गया। तुरंत मरीजों को बाहर निकाला गया। स्थानीय निवासी अनूप शाही ने बताया कि अगर फायर ब्रिगेड की गाड़ियां समय पर पहुंचकर आग पर काबू न पातीं तो बड़ा हादसा हो सकता था। जिस तरह से फैक्टरी से आग की लपटें उठ रही थीं, उसने सुरक्षा पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया। इस घटना ने एक बार फिर व्यावसायिक इमारतों और अस्पतालों के बीच सुरक्षित दूरी व फायर सेफ्टी ऑडिट की जमीनी हकीकत की पोल खोलकर रख दी है। सुबह 4 बजे से लगातार उठती आग की लपटों और धुएं के गुबार से 50 मीटर के दायरे में मकान, दुकान और अस्पताल के लोग परेशान हो गए। हर तरफ भागमभाग जैसी स्थिति रही। फायर ब्रिगेड के जवान लगातार आसपास के इलाकों से टैंकरों को रिफिल करते रहे। चांदपुर, मुढै़ला और आसपास के औद्योगिक संस्थानों से पानी भरा गया।
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फायर सुरक्षा की जांच के लिए कमेटी गठित
अग्निशमन स्टेशन अफसर विनोद पांडेय ने बताया कि फैक्टरी की फायर एनओसी थी और आग सुरक्षा बचाव के सभी मानक पाए गए। लेकिन, वहां म में रखे गए केमिकल, कार्टन, उपकरण ने आग में घी की तरह काम किया। आग को बुझाया गया लेकिन गोदाम में रह-रहकर आग की लपटें रात 10 बजे के बाद भी उठती रहीं। 95 फीसदी तक आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। जांच के लिए कमेटी गठित की गई है। मंडुवाडीह थाना प्रभारी दिगंबर उपाध्याय ने बताया कि आग के कारणों की जांच फायर ब्रिगेड करेगी।