UP College Murder Case: यूपी कॉलेज में सूर्य प्रताप सिंह की हत्या के बाद आरोपी मंजीत चौहान सर्किट हाउस रोड होते हुए कचहरी में एक अधिवक्ता के चैंबर में छिप गया था। छत से कूदकर भागने के दौरान उसके पैर में फ्रैक्चर हो गया था। ऐसे में उसने किसी तरह कचहरी पहुंचने के बाद अपने एक परिचित को फोन लगाया।
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धरने पर बैठे छात्रों से बातचीत करते अधिकारी।
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कॉलेज के आसपास लगे सीसी कैमरों और सर्विलांस के आधार पर मंजीत की तलाश में एसओजी समेत पुलिस की छह टीमें गठित की गई थीं। कचहरी स्थित एक अधिवक्ता के चैंबर में पहुंचे मंजीत के बारे में पुलिस को उसी अधिवक्ता ने सूचना दी। गिरफ्तारी के दौरान मंजीत पुलिस से उलझना चाह रहा था, लेकिन एनकाउंटर के भय से वह शांत हो गया। अधिवक्ता के यहां छिपे मंजीत को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन भेजा गया।
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मुख्य आरोपी मंजीत चौहान को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया।
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मंजीत ने पुलिस को बताया कि सूर्य की मनबढ़ई से वह आजिज आ गया था। हॉस्टल के छात्रों का साथ पाकर सूर्य खुद को कॉलेज का शहंशाह समझ बैठा था। सूर्य की हत्या के लिए उसने भदोही से 35 हजार रुपये में देसी पिस्टल खरीदी थी। दो साल से वह अवैध पिस्टल अपने साथ रखता था। वारदात वाले दिन कॉलेज परिसर में सूर्य को दौड़ाकर सीने और सिर में गोली मारी।
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बंद चैनल गेट से बाहर का दृश् देखते शिक्षक।
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शनिवार को शिवपुर पुलिस ने आरोपी को रिमांड मजिस्ट्रेट सौम्या पांडेय की कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने न्यायिक रिमांड बनाते हुए आरोपी को 14 दिनों की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया। एहतियातन कोर्ट में कैंट समेत तीन थानों की फोर्स तैनात रही और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई। एसओजी की पूछताछ में सामने आया कि छोटी-छोटी बातों पर सूर्य की टोका-टिप्पणी मंजीत को नागवार लगती थी।
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सूर्य प्रताप सिंह की हत्या के बाद बिलखता दोस्त।
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सूर्य के साथी आकाश और उत्कर्ष ने मंजीत को रोकने का प्रयास किया, लेकिन पिस्टल से निकलती गोलियों की वजह से वे सूर्य के नजदीक जाने की हिम्मत नहीं जुटा सके। वारदात के समय कक्षा संख्या 11 के सामने एक महिला प्रोफेसर और कुछ छात्राओं ने सूर्य को बचाने की गुहार लगाई, लेकिन मंजीत ने रहम नहीं किया।