आज कई देशों में सूर्य ग्रहण दिखाई दिया, जो साल का पहला और आखिरी सूर्य ग्रहण था। हमारे देश में ये 10 बजे से दिखना शुरू हो गया। दोपहर साढ़े तीन बजे करीब खत्म हुए इस ग्रहण का अद्भुत और अभूतपूर्व नजारा देश के कई हिस्सों और दुनिया में देखने को मिला। सूर्य ग्रहण का जिक्र महाभारत, पुराणों, रामायण, अथर्ववेद में भी मिलता है।
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सूर्य ग्रहण
- फोटो : अमर उजाला
ज्योतिष में रविवार के दिन मृगशिरा तथा आर्द्रा नक्षत्र एवं मिथुन राशि में पड़ने वाले सूर्य ग्रहण को चूड़ामणि सूर्य ग्रहण कहते हैं। इस ग्रहण का सभी राशियों के लिए प्रभाव कैसा रहेगा इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं। देश और दुनिया से सूर्य ग्रहण की तस्वीरें सामने आई हैं।
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Surya Grahan 2020, solar eclipse pictures
- फोटो : ANI
चार हजार साल पहले दिखा था पहला सूर्य ग्रहण
चाइनीज ग्रंथ शु-चिंग के अनुसार पहला सूर्य ग्रहण आज से करीब चार हजार साल पहले यानी 22 अक्टूबर 2134 ईसा पूर्व दिखा था। इस ग्रंथ के अनुसार आकाशीय ड्रैगन ने सूर्य को निगल लिया था। चाइनीज भाषा में ग्रहण शब्द को शी कहा जाता है, जिसका अर्थ है निगलना।
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सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य
- फोटो : अमर उजाला
चीन के ग्रामीण इलाकों में आज भी सूर्य ग्रहण के समय तेज आवाज में ड्रम बजाने की परंपरा है। ऐसा माना जाता है कि इस तेज आवाज से सूर्य को निगलने वाला ड्रैगन डर के भाग जाता है। प्राचीन काम में चीन में सूर्य और चंद्र ग्रहण को दिव्य संकेत माना जाता था।
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वाराणसी में ऐसा दिखा सूर्य ग्रहण।
- फोटो : अमर उजाला।
काशी में सूर्य ग्रहण का स्पर्श 10.30 बजे से शुरू हो गया। इसके 12 घंटे पहले ही सूतक लग गया। इसके चलते शहर के अधिकांश मंदिर रात में ही बंद हो गए। काशी विश्वनाथ मंदिर और अन्नपूर्णा मंदिर के कपाट रविवार की सुबह बंद कर दिए गए। सूतक काल समाप्त होने के बाद ही मंदिरों के कपाट खुल जाएंगे। आज सुबह 9.16 बजे से सूर्य ग्रहण लगा था। हालांकि, भारत में ये सुबह 10 बजे के बाद ही दिखाई दिया। ये साल का पहला और आखिरी सूर्य ग्रहण है। इसके बाद अगला सूर्य ग्रहण 25 अक्टूबर 2022 को भारत में दिखेगा।