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देखें तस्वीरेंः वाराणसी के इस गांव में हर घर पर रंग-बिरंगी तैरती मछलियां हैं खास

Wed, 23 Aug 2017 10:43 AM IST
amarujala.com, presented by अनुपम निशान्त
amarujala.com, presented by अनुपम निशान्त Updated Wed, 23 Aug 2017 10:43 AM IST
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painting - फोटो : अमर उजाला
‘सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं/ मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए/ मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही/ हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए...।’ ऐसी ही कोशिश से वाराणसी के सराय मोहाना गांव की सूरत बदलने लगी है।  गंगा किनारे बसे इस गांव की मछुआरों की बस्ती के हर घर की दीवारों पर बलखाती लहरों पर तैरती मछलियां देख इसे सराहे बिना आप नहीं रह सकते। सराय मोहाना की ये खूबी उसे दूसरे गांवों से अलग और खास बनाती है। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...
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painting - फोटो : अमर उजाला
दीवारों पर रंगों-जल तरंगों के जरिए लोगों की सोच में बदलाव लाने की इस मुहिम की शुरुआत की है 32 वर्षीय राज साहनी ने। मजदूर पिता के बेटे राज को दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से बीए (फाइन आर्ट्स) और एमए (फाइन आर्ट्स) की पढ़ाई के दौरान भी अपने गांव की चिंता थी। छह भाइयों में सबसे छोटे राज को आर्थिक कठिनाइयां भी झेलनी पड़ीं लेकिन स्कॉलरशिप के जरिए उन्होंने यूरोप के प्रमुख कला संग्रहालय देखे और अपने गांव को भी वैसा ही बनाने के ख्वाब बुनते रहे।
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painting - फोटो : अमर उजाला
राज की पहली चिंता थी गांव में पढ़ाई-लिखाई का एक बेहतर माहौल तैयार करने की। 2013 में उन्होंने काफी मशक्कत के बाद गांव के कुछ लोगों को एक लाइब्रेरी खोलने के लिए तैयार किया। बताते हैं, ‘काफी वक्त लगा लोगों को यह समझाने में कि उनकी तरक्की के लिए कुछ बदलाव जरूरी हैं।’  उन्हें मत्स्य समिति के कार्यालय में लाइब्रेरी के लिए एक कमरा दिया गया। राज ने कुछ किताबें अपने पैसे से खरीदीं और कुछ दिल्ली के दोस्तों से मांगकर ले आए और लाइब्रेरी शुरू हो गई। 
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painting - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद राज ने गांव के घरों को अपनी कला के हुनर से संवारने की ठानी। पहले अपने घर की दीवारों को म्यूरल आर्ट से सजाया। फिर चार-पांच घर और पेंट किए। इसे देखकर गांव के कुछ और उत्साही युवा आगे आए।  संस्कृति मंत्रालय की एक फेलोशिप पर वह 10 जुलाई को ही एक साल चीन में रहकर गांव लौटे और फिर गांव के बाकी घरों पर लहरें-मछलियां सजाने में जुटे हैं। इस काम के लिए वे कुछ पैसे गृहस्वामी से लेते हैं और बाकी खुद लगाते हैं। 
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painting - फोटो : अमर उजाला
गृहस्वामी से पैसा इसलिए लेते हैं ताकि इस सजावट से उन्हें अपनापन महसूस होता रहे। दीवारों पर मछलियां और लहरें ही क्यों? इस सवाल के जवाब में राज कहते हैं कि गंगा किनारे बसे इस गांव की करीब 70 फीसदी आबादी मछुआरों की है। इन चित्रों के जरिए अपने पारंपरिक पेशे से उनके जुड़ाव को हम उकेरते हैं।
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