ज्ञान की नगरी काशी में गुरु-शिष्य परंपरा का अद्भुत संगम रविवार को गुरु पूर्णिमा महोत्सव पर देखने को मिल रहा है। ज्ञान रूपी सागर में गोता लगाने के लिए शिष्यों का कारवां निकल पड़ा है। शहर के कई रास्ते जाम हो गए हैं। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें..
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- फोटो : अमर उजाला
गुरुरित्यभि धीयते...। ‘गु’ का अर्थ अंधकार और ‘रु’ का आशय निवारण करने वाले से है। यानी अंधकार का निवारण करने वाला। काशी में गुरु दर्शन का सबसे बड़ा मेला लगा। मौका था गुरु पूर्णिमा पर्व का। कहीं समाधियों की पूजा हुई तो कहीं संतों के पांव पखारे गए।
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पादुका पूजन, आरती और भंडारे के साथ शिष्यों ने इस समागम को उत्सवमयी बनाया। कहीं मेले लगे तो कहीं आस्था की कतारें लगीं।
गड़वाघाट आश्रम में रात को ही मेला लग गया। हल्की फुहारों के बावजूद वाहनों का लंबा रेला गड़वा घाट की ओर बढ़ने से लंका-सामने घाट से साथ ही कई सड़कों पर जाम की स्थिति बनी रही।
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सुबह गुरु शरणानंद महाराज ने समाधियों की पूजा की। आरती उतारी। इसके बाद वह सिंहासनारूढ़ हुए। इससे पहले गुरु के दर्शन के लिए लंबी कतारें लग गई थीं। राज्य सभा सदस्य अमर सिंह ने शरणानंद महाराज का आशीर्वाद लिया।पड़ाव स्थित सर्वेश्वरी समूह के अवधूत भगवान राम आश्रम में भोर में ही लंबी कतारें लग गईं।
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राजघाट पुल से कतारबद्ध होकर भक्त निकले। पीठाधीश्वर गुरु पद संभव राम की मौजूदगी में महायोनि पूजा के बाद श्रद्धालुओं ने गुरु के दर्शन किए। आश्रम परिसर में मुफ्त चिकित्सा शिविर भी लगाया गया था। मणिकर्णिका घाट स्थित सतुआ बाबा आश्रम में सुबह छह बजे पादुका पूजन हुआ।