श्री काशी विश्वनाथ धाम में जमीन की सारी बाधाएं दूर हो चुकी हैं। नजूल की जमीन का विवाद समाप्त होने के साथ ही काम में तेजी आ गई है। नजूल की दोनों जमीन पर एसटीपी और मल्टीपरपज हाल का नक्शा प्रस्तावित है।
काशी विश्वनाथ धाम में जमीन की बाधाएं दूर, भूकंप से बचाने को इस तकनीक का हो रहा उपयोग
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345.27 करोड़ रुपये की लागत से काशी विश्वनाथ धाम का निर्माण हो रहा है। एजेंसी का दावा है कि अगस्त 2021 तक प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा। धाम का गुलाबी स्वरूप अब आकार ले रहा है। जमीन से 15 मीटर ऊपर तक निर्माण कार्य नजर आने लगा है।
एक साथ 19 भवनों के निर्माण कार्य चल रहे हैं। उड़ीसा और चुनार के गुलाबी पत्थरों की आभा अब दर्शनार्थियों को भी नजर आने लगी है। बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु भी धाम की गुलाबी आभा को देखकर अभिभूत हैं।
जमीन की सारी बाधाएं अब दूर हो चुकी हैं। धाम के निर्माण के लिए पूरी जमीन अब उपलब्ध हैं। नक् शे के अनुसार कुछ मंदिरों के कारण परेशानी हो रही है। इसमें कई जगह नक् शे में बदलाव किए गए हैं। जरूरत पड़ी तो भविष्य में भी बदलाव होंगे।
संजय गोरे, श्री काशी विश्वनाथ धाम निर्माण एजेंसी पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता।
19 भवनों पर चल रहा है काम
मंदिर परिसर को लेकर गंगा घाट तक 24 इमारतें बनाई जाएंगी। इसमें से 19 इमारतों पर काम चल रहा है। इसमें मंदिर परिसर, मंदिर चौक, जलपान केंद्र, गेस्ट हाउस, यात्री सुविधा केंद्र, म्यूजियम, आध्यात्मिक पुस्तक केंद्र, मुमुक्षु भवन अस्पताल का निर्माण शुरू हो चुका है। मंदिर चौक का हिस्सा सी सेप में निर्मित किया जाएगा। यहां से सीधे मां गंगा के दर्शन किए जा सकेंगे।
मंदिर परिसर में गर्भगृह से लगा हुआ बैकुंठ मंदिर, दंडपाणि के साथ तारकेश्वर और रानी भवानी मंदिर रहेगा। इसके अलावा गर्भगृह से लगे बाकी विग्रहों को परिसर के पास ही बनाया जाएगा। परिसर में 34 फीट ऊंचाई वाले चार गेट होंगे। पूरे परिसर में मकराना और चुनार के पत्थर लगेंगे। परिसर लाइट से जगमगाएगा। यहां धार्मिक और आयुर्वेदिक महत्व के पेड़ भी होंगे।
कॉरिडोर के बाहरी हिस्से में जलासेन टैरेस का निर्माण किया जा रहा है। इस टैरेस पर खड़े होकर गंगा जी के साथ ही मणिकर्णिका, जलासेन और ललिता घाट को भी निहारा जा सकेगा।