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अमृतवाणी से गूंजा सीर गोवर्धन, संत रविदास की कठौती और स्वर्ण पालकी के दर्शन से भक्त हुए निहाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 31 Jan 2018 09:05 PM IST
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संत रविदास जयंती
- फोटो : अमर उजाला
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ऐसा चाहूं राज मैं जहां मिले सबन को अन्न, छोट बड़ो सभ सभ बसैं रविदास रहैं प्रसन्न...। की तर्ज पर संत रविदास ने जाति-पात, धर्म मजहब के भेद से रहित बिना किसी दुख के शांति और इंसानियत के जिस बेगमपुरा शहर की परिकल्पना की थी उसका स्वरूप बुधवार को बनारस में उनके जन्मस्थान सीर गोवर्धन में जयंती समारोह में नजर आया। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरे...
संत रविदास जयंती
- फोटो : अमर उजाला
जात-पात, ऊंच-नीच का भेद मिटाकर पुरुष और महिला श्रद्धालु अपने गुरू के दर्शन के लिए झूमकर सड़कों पर निकले। दर्शनार्थियों की लंबी लाइन के कारण सीर की सड़कें और गलियां ठसाठस भर गई थीं। आलम यह रहा कि भीड़ को संभालने के चक्कर में कई बार धक्का मुक्की तक हो गई।
संत रविदास जयंती
- फोटो : अमर उजाला
भक्तों ने संत की कठौती के अलावा स्वर्ण पालकी के भी दर्शन कर स्वयं को निहाल किया। बुधवार की सुबह 8 बजे संत निरंजन दास महाराज ने सतगुरु रविदास मंदिर में निशान साहब को फहराकर जयंती समारोह का विधिवत उद्घाटन किया।
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संत रविदास जयंती
- फोटो : अमर उजाला
अमृतवाणी के पाठ से पूरा सीर गूंजता रहा। ढोल नगाड़ों की थाप पर नाचते गाते श्रद्धालु अपने गुरू के दर्शन के लिए मंदिर पहुंच रहे थे। सुबह 8:30 बजे भीड़ का आलम यह हो गया कि पुलिस और सेवादारों को भीड़ नियंत्रित करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
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संत रविदास जयंती
- फोटो : अमर उजाला
सड़कों की पटरियों पर खिलौने भी सजाए गए और खेतों में झूले, चर्खियों पर खुशियों के शोर भी गूंजे। कहीं अटूट लंगर की पांत लगी रही तो कहीं भजनों की टोलियों के झांझ, मजीरे बजते रहे। फूल-मालाओं की दुकानों पर जमकर बिक्री हुई।