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रंगभरी एकादशी का बिखरा रंग, मां गौरी के श्रृंगार से शुरू हुई परंपरा

Sun, 17 Mar 2019 05:11 PM IST
Sayali Maurya न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी Published by: Sayali Maurya Updated Sun, 17 Mar 2019 05:11 PM IST
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Rangbhari ekadashi begun with makeup of goddess gauri in varanasi
काल भैरव की डोला यात्रा - फोटो : अमर उजाला

रंगभरी एकादशी पर 354 साल पुरानी परंपरा के तहत काशीवासी बाबा विश्वनाथ की गौरा संग पालकी के नयनाभिराम दर्शन को आतुर हैं। बाबा भी मां गौरा के गौने के लिए शुक्रवार को ससुराल पहुंच चुके हैं। महंत आवास पर गीत-गवनई के साथ गौने की रस्में भी शुरू हो चुकी हैं। बाबा के अखंड दीप के खप्पर के काजल से माता गौरा के नैनों का श्रृंगार हुआ। मां अन्नपूर्णा के दरबार से आए सिंदूर से माता की मांग भरी गई। देखें आगे की स्लाइड्स में...

Rangbhari ekadashi begun with makeup of goddess gauri in varanasi
नाचते भक्त - फोटो : अमर उजाला

मान्यता के अनुसार बाबा विश्वनाथ कैलाश पर्वत से चलकर राजसी स्वरूप में हिमपुत्री पार्वती का गौना कराकर कैलाश लाए थे। महंत आवास पर काशी पुराधिपति के रजत प्रतिमाओं का दर्शन भोग आरती के बाद शुरू हो हुआ, जो पालकी उठने के पूर्व तक निरंतर चलता रहा। शाम पांच बजे बाबा की पालकी की शोभायात्रा मंहत आवास से मंदिर के लिए निकली। 

Rangbhari ekadashi begun with makeup of goddess gauri in varanasi
शिवांजलि में कार्यक्रम प्रस्तुत करते कलाकार - फोटो : अमर उजाला

महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने बताया कि रंगभरी एकादशी पर मंगल बेला में साढ़े 3 बजे बाबा विश्वनाथ मां पार्वती और गणेश की चल प्रतिमाओं का हल्दी पूजन हुआ। उसके बाद दूध, दही, शहद, गंगाजल से स्नान कराया गया। फिर मंगला आरती की गई। इसके बाद भोर में साढ़े 4 बजे से 6 बजे तक वैदिक ब्राह्मणों द्वारा विशेष षोडशोपचार पूजन रुद्राभिषेक किया गया। भोर में साढ़े 6 बजे से साढ़े 8 बजे तक मातृका पूजन हुआ। 9 बजे चल प्रतिमाओं का राजसी शृंगार किया गया। महंत डॉ. तिवारी ने बताया कि रजत प्रतिमाओं का श्रृंगार करने के बाद बाबा विश्वनाथ के गर्भगृह में जलते अखंडदीप के खप्पर से काजल लाया गया और मां गौरा के नेत्रों में सजाया गया।

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Rangbhari ekadashi begun with makeup of goddess gauri in varanasi
शिवांजलि में कार्यक्रम प्रस्तुत करते कलाकार - फोटो : अमर उजाला

रंगभरी एकादशी पर होने वाली शिवांजलि बाबा को समर्पित थी। महंत आवास पर गीतकार कन्हैया दूबे केडी के संयोजन में दोपहर से ही गायन, वादन और नृत्य के आयोजन आरंभ किया। सिद्धार्थ बनर्जी की सिद्धवीणा, अर्चना आदित्य म्हस्कर, डॉ. अमलेश शुक्ला, स्नेहा अवस्थी, आराधना सिंह, अमित श्रीवास्तव का गायन आकर्षण का केंद्र रहा। लखनऊ से आए बॉबी झांकी ग्रुप काशी, अवध और बृज की होली, महाकाल की भस्म होली का प्रदर्शन किए।

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rang bhari ekadashi - फोटो : अमर उजाला

मां गौरा का गौना कराने ससुराल पहुंचे बाबा विश्वनाथ ने शनिवार को कलेवा चखा। महंत आवास पर परंपरा के अनुसार कलेवा की रस्म निभाई गई। शाम को महंत आवास में बने ससुराल में माता गौरा का गौना लेने के लिए बाबा विश्वनाथ के साथ आए गणों को पूड़ी, सब्जी सहित 11 तरह के पकवानों का भोग लगाया गया। इस दौरान बाबा विश्वनाथ व माता पार्वती की गोदी में प्रथम पूज्य गणेश की रजत प्रतिमाओं को एक साथ सिंहासन पर विराजमान कराकर पूजन व आरती उतारी गई। इस दौरान महिलाओं ने अखंड सुहाग की कामनाओं के साथ गीत भी गाए। 

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