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गजब की कलाकारी, साड़ी जैसे कपड़े पर उकेर दी पूरी रामायण

Mon, 18 Dec 2017 01:57 PM IST
amarujala.com, presented by तबस्सुम
amarujala.com, presented by तबस्सुम Updated Mon, 18 Dec 2017 01:57 PM IST
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Ramayan engrave on silk cloth in varanasi
टसर सिल्क के कपडे़ पर पूरी रामायण - फोटो : अमर उजाला
जब कलाकार की प्रतिभा नए आयाम तलाशती हुई कुछ अलग करने की चाह में छटपटाती है, तब नया सृजन होता है। ओडिशा के कलाकार संजय पात्रा ने काशी के पक्के महाल की तंग गलियों में साड़ी के आकार के टसर सिल्क के कपडे़ पर पूरी रामायण का चित्रण किया है। भगवान श्रीराम के जन्म से लेकर लंका विजय और राज्याभिषेक की गाथा कपड़े पर पिरोई है। आगे की स्लाइड्स में देखें... 

 
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Ramayan engrave on silk cloth in varanasi
टसर सिल्क के कपडे़ पर पूरी रामायण - फोटो : अमर उजाला
अपनी लोक कला के प्रसार के उद्देश्य से संजय छात्र-छात्राओं और विदेशी पर्यटकों को प्रशिक्षण भी देते हैं। संजय ने चार मीटर लंबे और 1.8 मीटर चौड़े टसर सिल्क पर पटचित्र से रामायण के कथानकों का सजीव चित्रण किया है। इसमें प्राकृतिक रंगों के साथ ही फैब्रिक कलर का इस्तेमाल किया है। 

 
Ramayan engrave on silk cloth in varanasi
टसर सिल्क के कपडे़ पर पूरी रामायण - फोटो : अमर उजाला
वह बताते हैं कि पटचित्र में प्राकृतिक रंगों का ही इस्तेमाल होता है। इस कृति को पूरा करने में उन्हें करीब सात महीने का वक्त लगा। कपड़े के किनारे उन्होंने भगवान श्रीराम की अलग-अलग गाथाओं को चित्रण किया और बीच में राज्याभिषेक के दृश्य को उकेरा है। 

 
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Ramayan engrave on silk cloth in varanasi
टसर सिल्क के कपडे़ पर पूरी रामायण - फोटो : अमर उजाला
करीब डेढ़ वर्ष पहले संजय काशी आए थे। यहां पक्का महाल को उन्होंने अपना कर्मक्षेत्र बनाया और अपनी लोक कला को महक बिखेरनी शुरू कर दी। लोहे की ‘कूंची’ थामे उनके हाथ जब ताड़ के पत्रों पर चलते हैं तो हर कोई बरबस रुक जाता है। ताड़ की पतली-पतली पत्तियों पर बेहतरीन कलाकारी उभर कर आती है। 

 
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Ramayan engrave on silk cloth in varanasi
टसर सिल्क के कपडे़ पर पूरी रामायण - फोटो : अमर उजाला
राणा महल घाट के ऊपर गली में स्थित एक रेस्टोरेंट की सीढ़ियों के नीचे ही संजय की पाठशाला में लगती है, जहां बीएचयू और विद्यापीठ के छात्र-छात्राएं, शिक्षक और विदेशी पर्यटक उनसे इस कला की बारीकियां सीखते हैं। पटचित्र ओडिशा की लोक कला है। इसमें देवी-देवताओं खास तौर से भगवान जगन्नाथ से जुड़े आख्यानों का चित्रण किया जाता है। मान्यता है कि जब भगवान जगन्नाथ विश्राम में जाते हैं तो उस दौरान उनकी प्रतिमा या विग्रह के स्थान पर इन्हीं चित्रों की ही पूजा की जाती है। 

 
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