हमारे बेटे के साथ ही पिता और परिवार के लोगों का ध्यान रखना... मैं सरहद पर देश की हिफाजत करूंगा और तुम अच्छे से घर-परिवार को संभालो... अब मैं किसको देखूं... किसे संभालूं... किससे क्या कहूं... हे भगवान ये क्या किया... हमने किसका क्या बिगाड़ा था... हमारे साथ ऐसा क्यों हुआ...। पुलवामा हमले में शहीद हुए वाराणसी के जवान रमेश यादव की पत्नी बार-बार ये बातें कहते हुए अचेत हो जा रहीं थी। देखें आगे की स्लाइड्स में...
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ramesh yadav
- फोटो : amar ujala
सीआरपीएफ की 61वीं बटालियन में तैनात चौबेपुर थानाक्षेत्र के तोफापुर गांव निवासी रमेश यादव छुट्टियों पर अपने गांव आए थे। छुट्टियां खत्म होने पर 12 फरवरी को रमेश घर से जम्मू के लिए रवाना हो गया। रवाना होने के बाद रास्ते से पत्नी रेनू को फोन किया था। फोन पर पत्नी को घर संभालने के लिए बोला और खुद पर पूरे देश संभालने की जिम्मेदारी की बात कही।
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awdesh yadav
- फोटो : amar ujala
परिजनों ने बताया कि 12 फरवरी को ड्यूटी पर जाने के लिए रमेश रवाना हुए तो खासे खुश थे और कहा था कि जल्द ही फिर आऊंगा। मगर किसे पता था कि रमेश अब तिरंगे में लिपटे हुए घर आएंगे। रमेश की शहादत पर तोफापुर के ग्रामीणों को गर्व है लेकिन उनके बूढ़े पिता और पत्नी का बिलखना देख कोई उन्हें ढांढस बधाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। आसपास के लोग दोनों को किसी तरह संभाल रहे हैं।
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ramesh yadav
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रमेश का एक डेढ़ साल का बेटा है। शुक्रवार को रमेश के घर पर जनसैलाब उमड़ा हुआ था। लोग शहीद के परिवार से मिलने आ रहे थे, उनका दुख बांटने आ रहे थे। इसी बीच में एक सीआरपीएफ का जवान भी आया। बेटे ने उस जवान की टोपी देखते ही कहा 'देखो मम्मी पापा आ गए'। उस मासूम को क्या पता कि पापा भारत मां की गोद में सो चुके है।
परिजनों ने बताया कि रमेश का बड़ा भाई राजेश कर्नाटक में दूध का व्यवसाय करता है। पिता श्याम नारायण घर पर रह कर खेती-किसानी करते हैं। गुरुवार की रात आठ बजे फोन आया तो रमेश के शहीद होने की जानकारी मिली। सहसा लोगों को भरोसा नहीं हुआ। लोग एक दूसरे से जानकारी लेने लगे। पुष्टि होते ही उनके परिजनों के साथ ही गांव में कोहराम मच गया। ग्रामीण देर रात तक रमेश के घर के बाहर इकट्ठा थे।