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भरे गले से सभी ने कहा- मौत के बाद भी जिनके नाम में जान है, ऐसे रमेश हमारे माटी की शान हैं
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Published by: Sayali Maurya
Updated Mon, 18 Feb 2019 10:18 AM IST
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- फोटो : amar ujala
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‘मौत के बाद भी जिनके नाम में जान हैं, ऐसे रमेश हमारी माटी की शान हैं...।’ शनिवार को वीर जवान शहीद रमेश यादव के परिजन, ग्रामीण और इलाकाई लोग कुछ इसी भाव से गर्व का एहसास करते दिखे। सभी का गला भरा था और आंखें नम थीं। जम्मू के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में शहीद हुए रमेश यादव शनिवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। देखें तस्वीरें आगे की स्लाइड्स में...
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रमेश की शहादत पर हाथों में तिरंगा लिया हुआ जनसैलाब जितना दुखी था उससे कहीं ज्यादा ज्यादा गुस्सा सभी के चेहरे पर पाकिस्तान और आतंकियों को लेकर दिखा। इस दौरान भारत माता की जय और शहीद रमेश अमर रहें का उद्घोष और पाकिस्तान मुर्दाबाद का नारा तोफापुर सहित आसपास के गांवों में घंटों गूंजता रहा।
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प्रयागराज से सड़क मार्ग से शहीद रमेश यादव का पार्थिव शरीर सीआरपीएफ के जवान लेकर तोफापुर स्थित उनके घर पहुंचे तो कोहराम मच गया। पत्नी रेनू, मां राजमती देवी और बहन सरोजा को संभालना गांव की महिलाओं के लिए मुश्किल हो गया था। चौतरफा मौजूद लोगों की आंखों से आंसुओं की धार रुकने का नाम नहीं ले रही थी।
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ग्रामीणों के साथ ही पुलिस-प्रशासन के अधिकारी, सीआरपीएफ के जवान और मौजूद राजनेता भी अपनी आंखों से आंसू पोंछते नजर आए। इन सबके बीच रमेश के पिता श्याम नारायण कभी अपने मासूम पोते आयुष को देख रहे थे तो कभी पत्नी, बेटी और बहु को ढांढस बंधा रहे थे।
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10:25 बजे रमेश की अंतिम यात्रा शुरू हुई तो जाल्हूपुर बाजार, भगतुआ बाजार होते हुए आठ किलोमीटर लंबा फासला तय कर 3:30 बजे सरसौल बलुआ घाट पहुंची। घाट पर सशस्त्र सलामी और मातमी धुन के बीच पिता श्याम नारायण ने मुखाग्नि दी तो एक बार फिर शहीद रमेश अमर रहें का उद्घोष होने लगा।
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