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11 फरवरी को जाते वक्त शहीद ने कहा था- बाबू जी अपना ख्याल रखियेगा, तीसरे दिन आई मौत की खबर

Mon, 18 Feb 2019 10:18 AM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क,अमर उजाला,चंदौली
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,चंदौली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Mon, 18 Feb 2019 10:18 AM IST
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11 February pulwama attack martyred awdhesh went back to jammu
- फोटो : amar ujala

रांची स्थित सीआरपीएफ कैंप से एक महीने की ट्रेनिंग लेकर 11 फरवरी की सुबह बहादुरपुर स्थित घर पहुंचे अवधेश को क्या मालूम था कि घर-परिवार और गांव की उसकी आखिरी यात्रा है। आतंकी हमले में शहीद अवधेश का पार्थिव शरीर शनिवार सुबह आठ बजे उनके गांव पहुंचा। वहीं, दोपहर 2 बजे उनके बूढ़े पिता ने अपने जिगर के टुकड़े को मुखाग्नि दी। पिता ने नम आंखों से अवधेश से आखिरी मुलाकात  की बातें बताई। देखें आगे की स्लाइड्स में...

11 February pulwama attack martyred awdhesh went back to jammu
- फोटो : amar ujala

पिता हरिकेश यादव ने बताया कि बेटे को छोड़ने के लिए खुद कैंट स्टेशन गए। वहां बेगमपुर एक्सप्रेस ट्रेन में बैठाने के बाद वह घर लौट आए। लेकिन क्या पता था कि बेटा अब दोबारा नहीं आ सकेगा। जाते वक्त अवधेश ने मुझसे कहा था कि बाबूजी अपना ख्याल रखिएगा,  अब कौन कहेगा...। गुरुवार की शाम कुछ लोग आए और बताया कि अवधेश का फोन बंद मिल रहा है। शुक्रवार की सुबह शहीद होने की खबर मिली। कहा कि मेरा लाल तो देश के लिए शहीद हो गया, अब कुछ भी घोषणा हो जाए मेरा लाल तो नहीं आ सकता।

11 February pulwama attack martyred awdhesh went back to jammu
- फोटो : amar ujala

वहीं कैंसर पीड़ित मां मालती देवी की तो जैसे आंखें ही पथरा गई हैं। अब उनका इलाज कौन कराएगा, यही कहकर रो रही हैं। रोते-रोते वह बेसुध हो जा रही हैं। छोटे भाई बृजेश का भी रोकर बुरा हाल है। पत्नी शिल्पी यादव जानकारी होने के बाद होश खो बैठी हैं। 

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11 February pulwama attack martyred awdhesh went back to jammu
- फोटो : amar ujala

मायके से पहुंचे पिता जनार्दन यादव के पैरों पर शिल्पी गिर पड़ी और बेहोश हो गई। दो बहनें पूनम और नीलम का रोकर बुरा हाल है। बहनें रो रही हैं कि अब राखी बंधवाने कौन आएगा। भैया क्यों छोड़ कर चले गए। दो साल का मासूम निखिल सबका चेहरा देख रहा है। उसे क्या पता कि अब उसके पापा इस दुनिया में नहीं हैं।

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11 February pulwama attack martyred awdhesh went back to jammu
- फोटो : amar ujala

पत्नी शिल्पी यादव अपने बेटे निखिल को गोद में लेकर उसे दिलासा बार-बार देती रही कि पापा हमेशा हमारे साथ रहेंगे। हमारी यादों में जिंदा रहेंगे। पत्नी शिल्पी यादव अपने बेटे निखिल को गोद में लेकर उसे दिलासा बार-बार देती रही कि पापा हमेशा हमारे साथ रहेंगे। हमारी यादों में जिंदा रहेंगे। 

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