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शहीद के भाई को रह गया एक मलाल, सरकार के सामने रखा ये प्रस्ताव

Fri, 22 Feb 2019 10:29 AM IST
Sayali Maurya न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी Published by: Sayali Maurya Updated Fri, 22 Feb 2019 10:29 AM IST
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Pulwama attack martyred ramesh yadav brother reached varanasi
- फोटो : amar ujala

जिंदगी में कभी-कभी ऐसा होता है कि बहुत कुछ बाकी रह जाता है और दिल में उस बात की टीस हमेशा रह जाती है। पुलवामा के आतंकी हमले में शहीद हुए रमेश यादव के भाई को भी उम्र भर इस बात का मलाल रहेगा कि वे अपने शहीद भाई का अंतिम दर्शन तक नहीं कर सके। रविवार को घर पहुंचे रमेश के भाई ने सरकार के सामने एक ऐसा प्रस्ताव रखा है जिसे जानकर हर भारतीय को उन पर फक्र होगा। देखें आगे की स्लाइड्स में...

Pulwama attack martyred ramesh yadav brother reached varanasi
- फोटो : amar ujala

वाराणसी के तोफापुर गांव के शहीद रमेश यादव के बड़े भाई राजेश यादव रविवार को दोपहर दो बजे बेलगांव (कर्नाटक) से घर पहुंचे तो भाई का चेहरा भी नहीं देख पाने के गम में आंखों से आंसू छलक गए। उन्हें रोता देखकर मां-बाप, बहन और शहीद की पत्नी रेनू दहाड़े मारकर रोने लगीं। 

Pulwama attack martyred ramesh yadav brother reached varanasi
- फोटो : amar ujala

राजेश ने कहा कि भाई देश की खातिर शहीद हो गया, इस पर मुझे गर्व है, लेकिन वह उनकी अंत्येष्टि में भी शामिल नहीं हो पाए, इसका जीवन भर दुख रहेगा। प्रधानमंत्री से यही अपेक्षा है कि जवानों की शहादत का बदला आतंकवादियों को मौत के घाट उतार कर लें। पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब दिया जाए। वहीं, राजेश ने सरकार के सामने प्रस्ताव रखा कि यदि सरकार मुझे सेना में सेवा का मौका दे तो मैं भी सीमा पर जाने से पीछे नहीं हटूंगा।

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Pulwama attack martyred ramesh yadav brother reached varanasi
- फोटो : amar ujala

उधर, रविवार को भी शहीद के घर और तोफापुर गांव में माहौल गमगीन रहा। शहीद रमेश के घर श्रद्धांजलि देने सेवापुरी विधायक नीलरतन पटेल भी पहुंचे और शहीद के पिता श्याम नारायण को आश्वस्त किया कि सरकार हरसंभव सहयोग करेगी। वाराणसी सर्राफा एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने भी आर्थिक सहयोग दिया। बिहार के कैमूर से शहीद रमेश के सैनिक मित्र भी पहुंचे और परिजनों को सांत्वना दी। शाम को राज्यमंत्री अनिल राजभर पहुंचे और परिवार को ढांढस बंधाया। कहा कि कोई भी परेशानी होगी तो वह मदद के लिए खड़े रहेंगे। 

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- फोटो : amar ujala

शहीद रमेश की मां राजमती ने बिलखते हुए कहा कि 12 फरवरी को घर से निकलते वक्त रमेश ने उनसे आशीर्वाद लिया था और वादा किया था कि वह जल्दी जाएगा। बेटे आयुष के पैर का इलाज कराऊंगा, लेकिन हमें क्या पता था कि एक माह तक साथ बैठकर हंसाने वाला रमेश अब कभी वापस नहीं जाएगा। 

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