गंगा के पलट प्रवाह से वरुणा भी उफान पर पहुंचे गई हैं। वरुणा के तटीय इलाके में लोगों ने घर छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की ओर रुख कर चुके हैं। गंगा अब काशी में चेतावनी बिंदु को पार कर चुकी हैं और खतरे की निशान की ओर दो सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ रही हैं।
21 अगस्त का सबसे अधिक बढ़ाव का रिकार्ड तोड़कर 70 मीटर के पार पहुंच चुकी हैं। घाटों पर दुकानें हटा ली गई हैं वहीं नदी किनारे कालोनियों में रहने वालों की धुकधुकी बढ़ गई है। ढाब के किसानों की बेचैनी बढ़ने लगी है। प्रशासन की ओर से चेतावनी भी जारी कर दी गई है।
रविवार को पुरानापुल, सलारपुर, पुलकोहना क्षेत्रों में वरुणा का पानी घरों में घुस गया। ढेलवरिया क्षेत्र में लोगों ने घरों को छोड़ना भी शुरू कर दिया है। जरूरत का सामान लेकर लोग ऊंचे क्षेत्रों में रहने चले गए हैं। कुछ लोगों ने किराए का मकान लिया है तो गरीबों ने रहने के लिए तिरपाल डाल दिया। सलारपुर क्षेत्र में लगभग 25 परिवारों के लगभग दो सौ लोग अपना मकान छोड़कर किराए के मकान में रहने को विवश हैं।
क्षेत्र के छेदीलाल, चमन, पिंटू, राजनाथ, मिंटू, नारायण, छोटेलाल, राजू यादव सहित 25 से 30 मकान बढ़ते जलस्तर के चपेट में आ गए हैं। पुरानापुल भट्टा क्षेत्र में भी बढ़ते जलस्तर से लोग अपने मकानों को छोड़कर किराए के मकान में रहने को विवश हैं। अनारू, बैजनाथ, सरफराज, अकरम सहित दर्जनों की संख्या में लोगों के घरों में पानी घुस गया है। कोनिया से लेकर चौकाघाट के बीच तटवर्ती इलाकों में हजारों घरों में वरुणा का पानी घुस गया। सैकड़ों लोगों ने अपने मकान छोड़ दिए हैं वहीं अधिकांश लोग चोरी के भय से निचले तल को खाली करके ऊपरी मंजिल पर रह रहे हैं।
खालिसपुर के घुरे, सलारपुर के बचई, लालबाबू, छोटे लाल, रज्जू, गुलजारी, गोविंद, रजिंदर, छेदी, पिंटू, राजनाथ सहित दर्जनों लोगों के घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है। लोग किराये पर या रिश्तेदारों के यहां शरण लेने को विवश हैं। बचई, छोटेलाल, गोविंद आदि का कहना है कि हम लोगों के गृहस्थी का सामान चावल, आटा, दाल, नमक, तेल भी घरों में ही है। जिसे निकाल पाना मुश्किल है। अगर प्रशासन से एक अदद नाव की व्यवस्था हो जाती तो सारा सामान निकाल लेते। इस बाबत जब नायब तहसीलदार शिवपुर से बात करने की कोशिश की गयी तो उनका मोबाइल ही स्विच ऑफ था।