बलिया जिले के मनियर नगर पंचायत की ईओ मणि मंजरी राय की मौत के बाद जांच का दायरा जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, इसमें नए-नए तथ्य सामने आ रहे हैं। 2012 में मामूली वेतन पर आउटसोर्सिंग पर रखे गए बाबू ने महज आठ साल में ही करोड़ों की संपत्ति खड़ी कर ली है। जबकि उस समय उसे दिया जाने वाला मासिक वेतन आठ साल में बढ़कर सिर्फ 15 हजार तक ही पहुंच सका है। इस समय हाल ये है कि उसने नगर पंचायत में न सिर्फ अपना घर बनवा लिया है, बल्कि भाइयों की दुकान भी खुलवा दी है।
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मणि मंजरी राय (फाइल फोटो)।
- फोटो : अमर उजाला।
इस बाबू की अहमियत कितनी है, इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि ये हर वक्त नगर पंचायत चेयरमैन के साए के तरह उनके साथ रहता है। मणि मंजरी राय की आत्महत्या के बाद चेयरमैन के साथ इस बाबू को भी मुकदमे में आरोपी बनाया गया है। यही नहीं मामले में चल रही पुलिस की जांच को लेकर भी अब सवाल उठने लगे हैं।
मनियर के लोगों के अनुसार वह, अपने आवास पर पुलिस के पहुंचने से बस कुछ देर पहले ही चेयरमैन बाइक पर सवार होकर कहीं निकल गया और उस वक्त वे हाथ फाइलों का पुलिंदा भी लिए हुए थे। इसकी सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।
नगर में बनवाया तीन मंजिला मकान
मनियर नगर पंचायत में कार्यरत इस कंप्यूटर बाबू को कंप्यूटर की अच्छी जानकारी होने के कारण पूर्व चेयरमैन संजय सिंह के कार्यकाल में वर्ष 2012 में पांच हजार रुपये मासिक वेतन पर रखा गया था। इस समय नगर पंचायत में अधिकतर कार्य कंप्यूटर के माध्यम से ही होने के कारण धीरे-धीरे उसकी पैठ ठेकेदारों में हो गई और चुनाव के बाद वह नए चेयरमैन का कारखास हो गया। उसकी बढ़ती संपत्ति को लेकर मोहल्ले में चर्चाएं तो खूब होती, लेकिन कोई मुंह नहीं खोल रहा था।
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मणि मंजरी राय (फाइल फोटो)।
- फोटो : अमर उजाला।
बताया जाता है कि नगर पंचायत में ज्वाइनिंग से पहले इसके परिवार की हालत बहुत अच्छी नहीं थी, पिता राजमिस्त्री थे और उन्हीं की कमाई से पूरे परिवार का खर्चा चलता था। फिर इसकी ज्वाइनिंग के बाद परिवार की स्थिति में अचानक बदलाव आना शुरू हुआ। देखते ही देखते इसने नगर में तीन मंजिला मकान खड़ा कर लिया, जिसकी कीमत इस समय करोड़ों में आंकी जा रही है। यही नहीं इसने अपने दो भाइयों में से एक की मेडिकल स्टोर तथा दूसरे की किराना स्टोर की दुकान भी खुलवा दी।