डॉक्टरों को धरती का भगवान ऐसे ही नहीं कहा जाता है। सरकारी और निजी अस्पतालों में कई चिकित्सक ऐसे हैं जो दायित्वों का निर्वहन तो करते ही हैं, साथ ही समाज के प्रति अगाध लगाव उन्हें औरों से अलग करता है। कोई दूसरों के लिए रक्तदान करता है तो कोई बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए मदद। कुछ चिकित्सक अपने ही नहीं, बल्कि दूसरे विभागों के मरीजों की जांच, भर्ती और ऑपरेशन में हर संभव मदद करते हैं। पढ़ें आगे की स्लाइड्स में...
Doctors Day 2019 : इलाज के साथ बांट रहे खुशियां, एक डॉक्टर की तो पीएम मोदी ने भी की तारीफ
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बीएचयू हृदय रोग विभाग से सेवानिवृत्त होने के बावजूद अब भी नियमित बीएचयू अस्पताल जाकर मरीजों को देखने वाले प्रो. टीके लहरी मरीजों को ही अपना सब कुछ मानते हैं। सुबह 8 बजे अस्पताल पहुंच जाते हैं। वह कभी दोपहर दो तो कभी तीन बजे घर लौटते हैं, लेकिन इसके लिए बीएचयू से कोई पारिश्रमिक नहीं लेते हैं। अविवाहित प्रो. लहरी ने सेवानिवृत्ति के तीन साल पहले से ही बीएचयू से सैलरी नहीं ली। मां के साथ बीएचयू कैंपस के न्यू मेडिकल लेन कॉलोनी में ही रह रहे हैं। उन्हें पूर्वांचल का सबसे पुराना हार्ट वॉल्व बदलने वाला विशेषज्ञ माना जाता है।
आज जगह-जगह से कन्या भ्रूण हत्या जैसी खबरें सामने आती रहती हैं, मगर स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. शिप्राधर बेटियों को बचाने की मुहिम में लगी है। उनके अस्पताल में नार्मल डिलीवरी से यदि बेटी का जन्म होता है तो वह फीस नहीं लेती हैं। यदि ऑपरेशन करना पड़ता है तो वह केवल पांच हजार रुपये लेती हैं। डॉ. शिप्रा बेटियों के जन्म पर कपड़े और उपहार देती हैं। साथ ही हर दिन 20 से 25 बेटियों को घर बुलाकर पढ़ाती हैं। 11 बेटियों की सुकन्या धन योजना की किश्त जमा करती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई लोग उनका उत्साहवर्धन कर चुके हैं।
रक्तदान के प्रति लोगों के मन में बहुत सी भ्रांतियां हैं और वह खून देने से कतराते हैं, ऐसे में डॉ. एसके सिंह रक्तदान कर दूसरों से खून का रिश्ता बना रहे हैं। वह साल में चार बार रक्तदान करते हैं। बीएचयू के पैथालॉजी विभाग में 1987 में बतौर रेजिडेंट उन्होंने पहली बार रक्तदान किया था। तब से वह रक्तदान करते आ रहे हैं। पिछले पांच साल से हर साल चार बार रक्तदान करने वाले डॉ. सिंह अपने जीवन में अब तक 66 बार रक्तदान कर चुके हैं। साथ ही लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित करते हैं, ताकि जरूरतमंदों को मदद मिल सके।
वहीं, डॉक्टर्स डे के अवसर पर सोमवार को रोटरी क्लब की विभिन्न संस्थाओं की ओर से वृहद रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया है। इसमें रोटरी क्लब वाराणसी शिवगंगा, काशी, वृंदा, सारनाथ, रोटरैक्ट क्लब वाराणसी शिवगंगा के संयुक्त तत्वावधान में रक्तदान शिविर और चिकित्सकों का सम्मान कबीरचौरा स्थित शिव प्रसाद गुप्त मंडलीय जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक में किया जा रहा है।