फूला हुआ पेट, कांपते हाथ, हड्डियों का ढांचा और बोझिल दिखती छोटी-छोटी आंखें, उन दोनों की हर सांस जिंदगी से संघर्ष करती हुई दिख रही थी। एक बच्ची का वजन तीन किलो सौ ग्राम और दूसरी का वजन तीन किलो छह सौ ग्राम है। वाराणसी के हरहुआ विकास खंड के गोसाईपुर गांव में शुक्रवार को जुड़वा कुपोषित बहनें मिलीं। जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। पढ़ें आगे की स्लाइड्स में...
जुड़वा बहनों की हर सांस कर रही थी जिंदगी से संघर्ष, 10 दिनों से मां ने ये आहार खिलाकर रखा जिंदा
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गोसाईपुर गांव में शुक्रवार को नोडल अधिकारी डॉ. अब्दुल जावेद और मुख्य सेविका चंद्र कला पाठक स्वास्थ्य टीम के साथ पहुंचे। उन्होंने दिनेश और उर्मिला की जुड़वा बच्चियों को देखा तो आश्चर्य चकित रह गए। दोनों बच्चियां हड्डियों के ढांचे की तरह नजर आ रही थीं। उन्होंने दोनों को तुरंत पं. दीन दयाल उपाध्याय जिला चिकित्सालय के पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया।
डॉ. जावेद के अनुसार दोनों बच्चियों को समय से दूध और भोजन नहीं मिल पाने की वजह से अतिकुपोषित हैं। मां उर्मिला को भी समय से भोजन नहीं मिलने के कारण वह बच्चियों को दूध नहीं पिला पा रही थी। स्थानीय लोगों के अनुसार उर्मिला पिछले 10 दिनों से बच्चों को साबुनदाना ही खिला रही थी। सही आहार नहीं मिलने के कारण एक बच्ची की हालत थोड़ी गंभीर थी। दोनों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती करा दिया गया है। नोडल अधिकारी डॉ. जावेद के अनुसार 10 महीने की दोनों बच्चियों का वजन 6 किलो 700 ग्राम से ज्यादा होना चाहिए।
बता दें कि केंद्र सरकार की ओर से ऐसे ही बच्चों को कुपोषण से उबारने के लिए बाल विकास एवं पुष्टाहार योजना और मिड डे मिल जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं। साल 1975 में शुरू हुई इस योजना का उद्देश्य भारत में कुपोषण की मार झेल रहे लगभग चालीस फीसदी बच्चों को जीवन देना है। इसके तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को 0 से 6 माह के बच्चों के परिवारों को हर महीने पंजीरी, बीनिंग फू ड, लगभग एक किलोग्राम, मीठा दलिया लगभग एक किलोग्राम और नमकीन दलिया लगभग एक किलोग्राम देना चाहिए।
जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि कुपोषित बच्चों की तलाश के लिए गांवों में अभियान चलाया जाता है, जो बच्चे मिलते हैं, उन्हें एनआरसी में भर्ती कराया जा रहा है। यह अभियान लगातार चलाया जा रहा है। वहीं, सीडीपीओ हरहुआ सुलेखा यादव ने कहा कि दोनों बच्चियां लगातार निगरानी में हैं। उनकी देखरेख कराई जा रही है।