फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

जुड़वा बहनों की हर सांस कर रही थी जिंदगी से संघर्ष, 10 दिनों से मां ने ये आहार खिलाकर रखा जिंदा

Sat, 29 Jun 2019 12:45 PM IST
Sayali Maurya न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी Published by: Sayali Maurya Updated Sat, 29 Jun 2019 12:45 PM IST
विज्ञापन
Malnourished Twins Sister under medication In Varanasi
कुपोषित बच्चियां - फोटो : अमर उजाला

फूला हुआ पेट, कांपते हाथ, हड्डियों का ढांचा और बोझिल दिखती छोटी-छोटी आंखें, उन दोनों की हर सांस जिंदगी से संघर्ष करती हुई दिख रही थी। एक बच्ची का वजन तीन किलो सौ ग्राम और दूसरी का वजन तीन किलो छह सौ ग्राम है। वाराणसी के हरहुआ विकास खंड के गोसाईपुर गांव में शुक्रवार को जुड़वा कुपोषित बहनें मिलीं। जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। पढ़ें आगे की स्लाइड्स में...

Malnourished Twins Sister under medication In Varanasi
सांकेतिक तस्वीर

गोसाईपुर गांव में शुक्रवार को नोडल अधिकारी डॉ. अब्दुल जावेद और मुख्य सेविका चंद्र कला पाठक स्वास्थ्य टीम के साथ पहुंचे। उन्होंने दिनेश और उर्मिला की जुड़वा बच्चियों को देखा तो आश्चर्य चकित रह गए। दोनों बच्चियां हड्डियों के ढांचे की तरह नजर आ रही थीं। उन्होंने दोनों को तुरंत पं. दीन दयाल उपाध्याय जिला चिकित्सालय के पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया।

Malnourished Twins Sister under medication In Varanasi
कुपोषित जुड़वा बहनें - फोटो : अमर उजाला

डॉ. जावेद के अनुसार दोनों बच्चियों को समय से दूध और भोजन नहीं मिल पाने की वजह से अतिकुपोषित हैं। मां उर्मिला को भी समय से भोजन नहीं मिलने के कारण वह बच्चियों को दूध नहीं पिला पा रही थी। स्थानीय लोगों के अनुसार उर्मिला पिछले 10 दिनों से बच्चों को साबुनदाना ही खिला रही थी। सही आहार नहीं मिलने के कारण एक बच्ची की हालत थोड़ी गंभीर थी। दोनों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती करा दिया गया है। नोडल अधिकारी डॉ. जावेद के अनुसार 10 महीने की दोनों बच्चियों का वजन 6 किलो 700 ग्राम से ज्यादा होना चाहिए। 

विज्ञापन
विज्ञापन
Malnourished Twins Sister under medication In Varanasi
सांकेतिक तस्वीर

बता दें कि केंद्र सरकार की ओर से ऐसे ही बच्चों को कुपोषण से उबारने के लिए बाल विकास एवं पुष्टाहार योजना और मिड डे मिल जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं। साल 1975 में शुरू हुई इस योजना का उद्देश्य भारत में कुपोषण की मार झेल रहे लगभग चालीस फीसदी बच्चों को जीवन देना है। इसके तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को 0 से 6 माह के बच्चों के परिवारों को हर महीने पंजीरी, बीनिंग फू ड, लगभग एक किलोग्राम, मीठा दलिया लगभग एक किलोग्राम और नमकीन दलिया लगभग एक किलोग्राम देना चाहिए। 

विज्ञापन
Malnourished Twins Sister under medication In Varanasi
जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह - फोटो : अमर उजाला

जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि कुपोषित बच्चों की तलाश के लिए गांवों में अभियान चलाया जाता है, जो बच्चे मिलते हैं, उन्हें एनआरसी में भर्ती कराया जा रहा है। यह अभियान लगातार चलाया जा रहा है। वहीं, सीडीपीओ हरहुआ सुलेखा यादव ने कहा कि दोनों बच्चियां लगातार निगरानी में हैं। उनकी देखरेख कराई जा रही है। 
 

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed