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मौत को मात दे चुका था मुन्ना बजरंगी, यूपी-दिल्ली पुलिस के दावों पर फेरा था पानी

Mon, 09 Jul 2018 11:15 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Mon, 09 Jul 2018 11:15 AM IST
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Mafia don munna Bajrangi being alive in UP delhi police encounter
Munna Bajrangi - फोटो : अमर उजाला

यूपी के गाजीपुर में भाजपा विधायक को गोलियां मारने के बाद मुन्ना बजरंगी का नाम जरायम जगत में टॉप पर पहुंच गया था। इस हत्याकांड ने यूपी के सियासी हलकों में हलचल मचा दी थी। शातिर दिमाग के धनी  मुन्ना बजरंगी ने एक बार मौत को भी मात दिया था। वो किस्सा 1998 का है जब बजरंगी ने दिल्ली पुलिस के दावों पर पानी फेर दिया था। आगे की स्लाइड्स में जानिए...

Mafia don munna Bajrangi being alive in UP delhi police encounter
encounter
इंटर स्टेट गैंग नंबर 233 के सरगना और उस समय के पांच लाख रुपए के इनामी मुन्ना बजरंगी को दिल्ली और यूपी पुलिस की सयुंक्त टीम ने समयबादली थाना क्षेत्र में 11 सितंबर 1998 को एक मुठभेड़ में मार गिराने का दावा किया था। 

 
Mafia don munna Bajrangi being alive in UP delhi police encounter
मुन्ना बजरंगी - फोटो : SELF
मुन्ना बजरंगी की मौत की खबर भी प्रसारित हो गई पर अस्पताल पहुंचा तो उसकी सांसें चल रही थी। जब पुलिस मुठभेड़ में उसके मारे जाने की खबर आई तो लोगों ने राहत की सांस ली। लेकिन, राममनोहर लोहिया अस्पताल पहुंच कर जब उसने आंखें खोल दी तब उसके शातिर होने का लोगों को अहसास हुआ।


 
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Mafia don munna Bajrangi being alive in UP delhi police encounter
munna bajrangi - फोटो : अमर उजाला
दर्जनों गोली लगी होने के बाद भी मुन्ना उस समय मौत को मात देने में कामयाब रहा था। जौनपुर जिले के पूरेदयाल गांव में जन्मे मुन्ना बजरंगी ने पांचवी तक की पढ़ाई की थी। कम पढ़े-लिखा होने के बावजूद वह शातिर दिमाग का धनी था।  पूर्वांचल में अपनी साख बढ़ाने के लिए मुन्ना बजरंगी 90 के दशक में बाहुबली माफिया और राजनेता मुख्तार अंसारी के गैंग में शामिल हो गया था। 

 
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Mafia don munna Bajrangi being alive in UP delhi police encounter
गुर्गे चाय-सिगरेट का मजा लेते रहे - फोटो : amar ujala

पूर्वांचल में सरकारी ठेकों और वसूली के कारोबार पर मुख्तार अंसारी का कब्जा था। लेकिन इसी दौरान तेजी से उभरते भाजपा विधायक कृष्णानंद राय उनके लिए चुनौती बनने लगे। उन पर मुख्तार के दुश्मन बृजेश सिंह का हाथ था।  उसी के संरक्षण में कृष्णानंद राय का गैंग फल फूल रहा था। इसी वजह से दोनों गैंग अपनी ताकत बढ़ा रहे थे। इनके संबंध अंडरवर्ल्ड के साथ भी जुड़े गए थे।

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