वाराणसी लोकसभा सीट पर दावेदारी के लिए कलेक्ट्रेट पर 29 अप्रैल से ही राजनीतिक ड्रामा जारी है। सोमवार को जुलूस निकाल कर कलेक्ट्रेट पहुंची सपा प्रत्याशी शालिनी सिंह के पार्टी ने नामांकन से ठीक पहले झटका दे दिया था। नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया खत्म होने के ठीक पहले सपा ने बीएसएफ के बर्खास्त जवान तेज बहादुर को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया। उसके बाद शुरू हुआ नामांकन खारिज होने के दौर। पढ़ें आगे की स्लाइड्स में...
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी सीट से सपा प्रत्याशी के तौर पर नामांकन करने वाले बीएसएफ के बर्खास्त सिपाही तेज बहादुर यादव की मुश्किलें कम हुई। पहले को तेजबहादुर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे थे। इसके बाद सपा का साथ मिलते ही उन्होंने पार्टी की तरफ से महासंग्राम की जंग छेड़ दी। लेकिन तेज बहादुर के सपनों पर तब पानी फिरता नजर आया जब उनके खिलाफ निर्वाचन अधिकारी द्वारा दो नोटिस जारी किए गए।
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पुलिस के साथ नोकझोंक करते तेज बहादुर यादव के समर्थक
- फोटो : अमर उजाला
नोटिस का जवाब देने के लिए निर्वाचन अधिकारी सुरेंद्र सिंह ने तेज बहादुर को बुधवार दोपहर 11 बजे तक का वक्त दिया था। तेज बहादुर यादव अपने वकील के साथ आरओ से मिलने पहुंचे। 11 बजे पहुंचे। जिसके बाद निर्वाचन अधिकारी ने तेज बहादुर के जवाबों से संतुष्ट ना हो कर उनका नामांकन पत्र खारिज कर दिया।
बीएसएफ के बर्खास्त जवान तेज बहादुर के समर्थकों ने इस दौरान डीएम पोर्टिको को घेर लिया। तेज बहादुर के समर्थकों की मांग थी कि तेज बहादुर का नामांकन रद्द न किया जाए। इस दौरान तेज बहादुर के समर्थकों ने सेना की वर्दी और तिरंगा लेकर जमकर नारेबाजी की। समर्थकों ने आरोप लगाया कि साजिश के तहत तेज बहादुर के पर्चा रद्द किया जा रहा है। ये षड्यंत्र भाजपा सरकार और निर्वाचन अधिकारियों ने रचा है।
इस मौके पर रिटायर्ड फौजी पंकज मिश्रा ने चेतवानी दी कि तेज बहादुर का पर्चा रद्द होने पर वे अनवरत धरना देंगे और उनके साथ देश भर से सेना के जवान वाराणसी आएंगे। इस नोकझोंक के दौरान एक भी सपा नेता और कार्यकर्ता नहीं दिखे। मौके पर पहुंचे एडीएम सिटी और एसपी सिटी ने धरना खत्म कराया और नामांकन स्थल से प्रदर्शनकारियों को 100 मीटर दूर कर दिया। इस दौरान कुछ समर्थक जमीन पर लेट कर प्रदर्शन करने लगे।