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मंदिर के इतिहास में पहली बार कुंभाभिषेक, वैदिक मंत्रों से गूंजा काशी विश्वनाथ का दरबार 

Tue, 03 Jul 2018 10:18 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Tue, 03 Jul 2018 10:18 AM IST
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Kumbhabhishek in kashi vishwanath temple at varanasi
Kumbhabhishek - फोटो : अमर उजाला
राज राजेश्वर स्वरूप में स्थापित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में कुंभाभिषेक के लिए सोमवार की शाम संकल्प के साथ मंदिर परिसर वैदिक मंत्रों की पावन अनुगूंज से गूंज उठा। 21 विद्वान ब्राह्मणों ने विधिविधान से संकल्प की प्रक्रिया पूरी कराई। आगे की स्लाइड्स में देखें...


 
Kumbhabhishek in kashi vishwanath temple at varanasi
Kumbhabhishek - फोटो : अमर उजाला
बाबा के दरबार में पहली बार होने जा रहे कुंभाभिषेक के लिए मंगलवार को गंगा तट से भव्य कलश शोभायात्रा निकाली जाएगी। मंदिर परिक्षेत्र से होते हुए यात्रा के बाबा के दरबार पहुंचेगी और फिर विधिविधान से मुख्य अनुष्ठान शुरू हो जाएगा। चार दिन तक चलने वाली इस पूजा का सोमवार की शाम श्रीगणेश हुआ। रेड जोन स्थित तारकेश्वर महादेव मंदिर में दक्षिण भारतीय वैदिक ब्राह्मणों की अगुवाई में काशी की जनता और मंदिर के अधिकारियों ने कुंभाभिषेक का संकल्प लिया। 

 
Kumbhabhishek in kashi vishwanath temple at varanasi
Kumbhabhishek - फोटो : अमर उजाला
काशी विश्वनाथ मंदिर के 240 साल के इतिहास में पहली बार होने जा रहे कुंभाभिषेक के यजमान दक्षिण भारतीय सुबू सुंदरम और उनकी पत्नी अन्नपूर्णी हैं। पं. पिचाई गुरुकुल के आचार्यत्व में कुंभाभिषेक के संकल्प की प्रक्रिया पूरी कराई गई। इसके उपरांत विघभनों के नाश के लिए विघभनहर्ता भगवान श्री गणेश का पूजन आरंभ हुआ। 

 
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Kumbhabhishek in kashi vishwanath temple at varanasi
Kumbhabhishek - फोटो : अमर उजाला
कुंभाभिषेक की प्रक्रिया के तहत तीन जुलाई को कलश शोभायात्रा का आयोजन किया जाएगा। भगवान विश्वनाथ के मंदिर में गंगाजल से पूरित कलशों का विधिवत तीन से पांच जुलाई तक 13 विधियों से पूजन किया जाएगा। उसके उपरांत पांच जुलाई को स्वर्ण शिखर से लगायत बाबा के गर्भगृह का अभिमंत्रित और पूजित जल से कुंभाभिषेक किया जाएगा। 

 
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Kumbhabhishek in kashi vishwanath temple at varanasi
amarujala - फोटो : amarujala
उधर, श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने कुंभाभिषेक पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा है कि काशी विश्वनाथ मंदिर न तो जीर्ण है और न ही इसका जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। ऐसे में यहां कुंभाभिषेक कराने का कोई औचित्य नहीं है। यह ठीक है कि दक्षिण भारतीय भक्तों के लिए बाबा विश्वनाथ की महत्ता विशिष्ट है लेकिन जिस प्रकार दक्षिण के ब्राह्मणों को बुलाकर यह कार्य कराया जा रहा है, वह उत्तर भारतीय ब्राह्मणों द्वारा अपनाई जाने वाली पूजन पद्धति से भिन्न है। एक प्रकार से यह मंदिर की पूजा परंपरा को बदलने का प्रयास किया जा रहा है।
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