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ब्रिटिश आर्मी से बगावत कर नेता जी मिले थे कर्नल निजामुद्दीन, जानें पूरी कहानी

Mon, 06 Feb 2017 09:34 PM IST
टीम डिजिटल,वाराणसी
टीम डिजिटल,वाराणसी Updated Mon, 06 Feb 2017 09:34 PM IST
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कर्नल निजामुद्दीन - फोटो : अमर उजाला

आजाद हिंद फौज में नेताजी सुभाषचंद्र बोस के चालक कर्नल निजामुद्दीन उर्फ सैफुद्दीन का 117 वर्ष की अवस्था में सोमवार को तड़के निधन हो गया। उन्होंने आजमगढ़ जिले के ढकवां स्थित अपने पैतृक आवास पर अंतिम सांस ली। कर्नल निजामुद्दीन के निधन की सूचना मिलते ही जिले से बड़ी संख्या में लोग उनके आवास पहुंचे। प्रशासनिक अमला भी उनके गांव पहुंचा और श्रद्धांजलि अर्पित की। वो अपने पीछे पत्नी अजबुन्निशा तथा तीन पुत्रों, बहुओं पौत्र, पौत्रियों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। 
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कर्नल निजामुद्दीन - फोटो : अमर उजाला
कर्नल निजामुद्दीन का जन्म आजमगढ़ जिले के ढकवा गांव में 01 जनवरी सन 1900  में हुआ था।  उनकी प्राथमिक शिक्षा घर पर ही हुई। उन्होंने दीनी तालीम पायी। बचपन गांव  में ही गुजरा। 22-23 साल की अवस्था में घर से बिना बताए सिंगापुर चले गए। उनके पिता इमाम अली सिंगापुर में कैंटीन  चलाते थे। सिंगापुर पहुंच कर वह पिता का हाथ बंटाने लगे। कुछ वर्षों बाद किसी को कुछ बताए बिना चले गए और ब्रिटिश आर्मी में  भर्ती हो गए।
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कर्नल निजामुद्दीन - फोटो : अमर उजाला
उस समय ब्रिटिश आर्मी और जापान के बीच युद्ध चल रहा था। ब्रिटिश आर्मी चीफ ने फौज को निर्देश दिया कि भारतीय भरे मर जाएं लेकिन ब्रिटिश खच्चर नहीं मरना चाहिए।  यह सुनकर निजामुद्दीन बगावत कर सीधे नेता जी सुभाषचंद्र बोस के पास पहुंचे और अपनी व्यथा सुनाई। नेताजी ने उनको आजाद हिंद फौज में भर्ती कर लिया।  
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कर्नल निजामुद्दीन - फोटो : अमर उजाला

कर्नल निजामुद्दीन नेताजी के चालक के साथ ही अंगरक्षक भी थे।  सन1943 में सिंगापुर के कैथो हॉल में पहली बार राष्ट्रीय गीत कदम कदम  बढ़ाये जा, खुशी के गीत गाये जा गाया गया। वहीं नेताजी ने  तुम मुझे खून दो, मैं  तुम्हें आजादी दूंगा का नारा दिया। नेता जी के साथ  इन्होंने कई देशों का पनडुब्बी से भ्रमण किया।
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कर्नल निजामुद्दीन - फोटो : अमर उजाला
 नेता जी के साथ वह जापान के  टोक्यो में जाकर वहां के प्रधानमंत्री टोजो से मिले और आजाद हिन्द फौज के लिए मदद मांगी। नेताजी ने हिटलर से निजामुद्दीन का परिचय बहादुर और अच्छे निशानेबाज के रूप में कराया था। हिटलर ने कर्नल निजामुद्दीन के  निशानेबाजी की परीक्षा ली और निशानेबाजी से प्रभावित होकर उन्हें एक गन भेंट की। 
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