नमो घाट की सीढि़यों पर बैठे तीन हजार दर्शक कभी काशी तमिल मंगल बंदिशों के मोह में बंधे तो कभी विरह-वेदना की रचना में रचे नजर आए। संगमम 4.0 के चौथे दिन शनिवार को विरह-वेदना से लेकर मांगलिक अवसरों के लोकगीतों और नृत्यों का मिलाप हुआ।
सबसे पहले विष्णु यादव और ग्रुप ने बनारस बम-बम बोले..., काशी भ्रमण और मोदी जी के बनल सरकार बा... जैसे बिरहा गाए तो दर्शक घंटों नाचते रह गए। बिरहा आम तौर पर विरह-वेदना या विदाई के अवसर पर ही गाया जाता है लेकिन विष्णु यादव ने इसे खुशी के गीत में तब्दील कर गाते हुए दर्शकों तक पहुंचाया तो इस अंदाज ने उनका खूब मनोरंजन किया।
दूसरी ओर केरल और तमिलनाडु में शादी ब्याह और बुवाई जैसे मांगलिक कार्यों में गाई जाने वाली लोकगीत 'कुंभी' की प्रस्तुति भी खूब सराही गई। रविचंद्रन और उनकी टीम के वाद्यों और नर्तकियों का तालमेल इतना बेहतर था कि हर कोई थिरकने पर मजबूर हो गया। ये कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति थी।
राम भजन और मुरली मनोहर कथक की प्रस्तुति: दूसरी प्रस्तुति लेकर आए शुभम त्रिपाठी और दल ने गणेश वंदना की। इसके बोल थे गौरी के पुत्र, अभिमान रहेगा..., जय भोले जय भोले शंकर... थे। वहीं रविचंद्रन की टीम ने कोलट्टम लोक नृत्य पर तीसरी प्रस्तुति दी। काशी की रंजना उपाध्याय और टीम ने कथक की प्रस्तुति देकर लोगों को मुग्ध कर दिया।
राम भजन और मुरली मनोहर पर कथक की प्रस्तुति दी। नृत्य का समापन तराना से हुआ। पांचवीं प्रस्तुति लेकर पहुंचे रविचंद्रन और टीम ने तमिलनाडु और केरल में प्रसिद्ध कुंभी लोक नृत्य करके लोगों को अपना मुरीद बना लिया। ये कार्यक्रम उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज और दक्षिण क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र तंजावूर की ओर से कराया जा रहा है।
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आयोजन में झूमते तमिल मेहमान।
- फोटो : संवाद
शैक्षणिक भ्रमण पर नमो घाट पर पहुंचे 800 विद्यार्थी
काशी तमिल संगमम के तहत शनिवार को नमो घाट पर तमिल साहित्य कार्यक्रम का आयोजन हुआ। आए दल ने स्टालों का अवलोकन किया और तमिल साहित्य की पुस्तकें आदि देखी। तमिल महापुरुषों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने ओडीओपी के स्टाल पर प्रदर्शित चीजों को देख प्रभावित हुए।
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गायन प्रस्तुत करते कलाकार।
- फोटो : संवाद
आज के 5 शब्द
तमिल - हिंदी
कण्णु - आंख
इमै - पलक
पुरुवम् - भौंह
कादु - कान
मूक्कु - नाक
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काशी तमिल संगमम में आयोजन।
- फोटो : अमर उजाला
काशी तमिल संगमम का तीसरा समूह पहुंचा श्री काशी विश्वनाथ धाम
काशी तमिल संगमम का तीसरा समूह शनिवार को श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंचा। तृतीय समूह के आगमन पर काशी विश्वनाथ मंदिर के अधिकारियों ने डमरू दल और पुष्पवर्षा के साथ सभी अतिथियों का स्वागत किया। स्वागत के उपरांत सदस्यों को मंदिर प्रशासन द्वारा काशी विश्वनाथ धाम के भव्य कॉरिडोर का भ्रमण करवाया गया।
काशी तमिल संगमम के समूह ने भ्रमण के दौरान धाम के ऐतिहासिक स्वरूप, स्थापत्य कला, नवनिर्मित सुविधाओं और निरंतर बढ़ती श्रद्धा-धारा के बारे में जानकारी प्राप्त की। सभी ने गंगा द्वार से मां गंगा का दर्शन किया। भ्रमण पूर्ण होने पर सभी अतिथियों के लिए मंदिर द्वारा संचालित अन्नक्षेत्र में दोपहर के भोजन की व्यवस्था की गई।
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काशी तमिल संगमम की मनोहारी प्रस्तुति।
- फोटो : अमर उजाला
अन्नक्षेत्र में परोसे गए प्रसाद ने सभी को काशी की सेवा-परंपरा और अतिथि-भावना का अनुभव कराया। तमिल डेलीगेशन ने देखी चोलों की कांस्य प्रतिमा और नटराज मूर्तियां: काशी तमिल संगमम 4.0 में आए डेलीगेट्स ने भारत कला भवन का दौरा कर चोल काल की कांस्य प्रतिमा, नटराज मूर्ति और मूर्तिकला को देखा। मालवीय गैलरी में रखे महामना के भारतरत्न सम्मान की स्मृति, दुर्लभ दस्तावेज, फोटोग्र्राफ्स और आर्टवर्क को देखकर आश्चर्य में दिखे। इसके अलावा यहां पर लगी गंगा-कावेरी संप्रवाह प्रदर्शनी में सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और आर्टिस्टिक संबंधों को दिखाया गया।