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काशी के इस भवन में कभी लगती थी मोक्ष प्राप्ति के लिए कतार, मगर आज कुछ और बात
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 11 May 2018 10:59 AM IST
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mukti bhavan
- फोटो : अमर उजाला
धर्म नगरी काशी पूरी दुनिया में मोक्ष यानि मुक्ति के लिए जानी जाती है। ऐसी मान्यता है कि काशी में मरने वाला सीधे स्वर्ग जाता है। इसलिए अंतिम समय में लोग अपने परिजनों को वाराणसी के काशी लाभ मुक्ति भवन लाते हैं, उनके साथ रहकर उनकी मौत की कामना करते हैं। यह सिलसिला कई वर्षों से से चला आ रहा है लेकिन अब स्थिति थोड़ी दूसरी है। आगे की स्लाइड्स में जानिए..
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वाराणसी के प्रमुख चौराहों में एक गोदौलिया स्थित काशी लाभ मुक्ति भवन में एक समय मोक्ष प्राप्ति के लिए देश भर से लोग आते थे। इस धर्मशाला के 12 कमरों में ठहरने के लिए लोगों को इंतजार करना पड़ता था। इन्हीं कमरों में रहकर लोग अपनी मौत का इंतजार करते थे। इन दिनों यहां ज्यादातर कमरे खाली रहते हैं। इनमें कोई रहने नहीं आता है।
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- फोटो : अमर उजाला
इसका कारण मनुष्य का सांसारिक मोह-माया से मुक्त नहीं हो पाना माना जा रहा है। 1958 में डालमिया चैरिटेबल ट्रस्ट के इस भवन के दरवाजे उन लोगों के लिए खोले थे, जो काशी में मोक्ष की कामना से आते हैं। यहां रहने का शुल्क नहीं लिया जाता है।
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- फोटो : अमर उजाला
लोग अपने अंतिम समय में घर से गौ दान कर यहां आते हैं। बुजुर्ग के साथ परिवार का एक सदस्य भी उनके अंतिम समय तक रुक सकता है। 48 साल से यहां की देखभाल कर रहे भैरव नाथ शुक्ला ने दावा किया, इस भवन में रोज किसी न किसी को मोक्ष मिलता है।
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अब तक लगभग 15 हजार लोग यहां रहकर मोक्ष प्राप्त कर चुके हैं। हिंदू मान्यता है कि भगवान शिव ने काशी नगरी का निर्माण मनुष्य की मुक्ति के लिए किया है। इसलिए यहॉ लोग अपना शरीर त्याग कर मोक्ष की प्राप्ति के लिए आते हैं।