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PHOTO : बृजवासी की राधे-राधे धुन पर झूमी काशी, काशी गंगा महोत्सव की तीसरी शाम; गूंजा हर-हर महादेव

Fri, 15 Nov 2024 11:10 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Fri, 15 Nov 2024 11:10 AM IST
सार

Varanasi News : काशी गंगा महोत्सव की तीसरे दिन कलाकारों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी। दर्शक भी मंत्रमुग्ध दिखे। राई नृत्य की प्रस्तुति होते ही लोग झूम उठे। पूरा घाट तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

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Kashi danced tune of Brijwasi Radhe-Radhe third evening of Kashi Ganga Mahotsav Har-Har Mahadev resounded
गंगा महोत्सव में राई नृत्य प्रस्तुत करतीं झांसी की कलाकार। - फोटो : अमर उजाला

गंगा महोत्सव की तीसरी निशा में हेमंत बृजवासी ने काशी में हर किसी को वृंदावन का अहसास कराया। शिव की नगरी में राधे-राधे की धुन पर काशीवासी भी थिरक उठे। बैकुंठ चतुर्दशी का यह संयोग मात्र ही था कि कान्हा की नगरी के कलाकार ने शिव की नगरी से उनको नमन किया।





काशी गंगा महोत्सव की छठवीं प्रस्तुति लेकर मंच पर मथुरा के हेमंत बृजवासी पहुंचे। उन्होंने मां गंगा और राधे रानी को प्रणाम करके काशी की धरती से वृंदावन की धरती को नमन किया। उन्होंने राधे-राधे... की तान छेड़ी। इसके बाद उन्होंने प्रथम नवाऊं शीश..., जय राधे-राधे... का सुर लगाया तो सामने कुर्सी पर बैठे दर्शक खुद क रोक नहीं सके। 

Kashi danced tune of Brijwasi Radhe-Radhe third evening of Kashi Ganga Mahotsav Har-Har Mahadev resounded
गंगा महोत्सव में नृत्य करतीं कलाकार। - फोटो : अमर उजाला

इसके बाद हेमंत ने हैं तेरे भगत निराले शिव शंकर डमरू वाले..., रघुकुल रीत सदा चली आई प्राण जाई पर वचन ना जाई... की प्रस्तुति दी। इससे पहले बनारस घराने की तीन पीढि़यों का सितार वादन आकर्षण का केंद्र रहा। पं. शिवनाथ मिश्र, उनके पुत्र पं. देवब्रत मिश्र और पौत्र कृष्णा मिश्र ने एक साथ मंच संभाला। सबसे पहले राग किरवानी की अवतारणा की। इसमें मध्यलय में रूपक ताल एवं द्रुत में तीन ताल की बंदिश प्रस्तुत किया।



दूसरा कार्यक्रम धारवाड़ की सुजाता गुरव के गायन का रहा। उन्होंने राग मधुवंती में निबद्ध बंदिश से शुरुआत की और समापन भजन से किया। गंगा महोत्सव की तीसरी प्रस्तुति में वायलिन पर पं. सुखदेव मिश्र, सितार पर पं. नरेंद्रनाथ मिश्र और तबले पर पं. किशोर मिश्र ने संगत की। चौथा कार्यक्रम सौरव-गौरव मिश्रा के कथक का रहा। इसके बाद आस्था शुक्ला और अमलेश शुक्ला ने मंच संभाला। 

Kashi danced tune of Brijwasi Radhe-Radhe third evening of Kashi Ganga Mahotsav Har-Har Mahadev resounded
सौरव और गौरव मिश्रा की प्रस्तुति ने किया मंत्र मुग्ध। - फोटो : अमर उजाला
तीन पीढ़ियों ने मंच पर सजाए 12 पीढि़यों के संगीत संस्कार
अस्सी का किनारा पहली बार 12 पीढि़यों की संगीत साधना का साक्षी बना। तीन पीढि़यों ने एक साथ मंच पर सितार की प्रस्तुति देकर यह सिद्ध कर दिया कि बनारस घराने का नाम यूं ही दुनिया में मशहूर नहीं है। पद्मश्री से सम्मानित बनारस घराने के सितारविद पं. शिवनाथ मिश्र अपने परिवार में दसवीं पीढ़ी के कलाकार हैं। उनके परनाना पंडित रामदास मिश्र बनारस घराने के प्रसिद्ध गायक रहे। पं. शिवनाथ मिश्र के पुत्र पं. देवब्रत मिश्र उनकी राह पर चलते हुए 11वीं पीढ़ी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वहीं, उनके पौत्र कृष्णा मिश्र 12वीं पीढ़ी में अपने दादा गुरु से सितार के गुर सीख रहे हैं। 
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Kashi danced tune of Brijwasi Radhe-Radhe third evening of Kashi Ganga Mahotsav Har-Har Mahadev resounded
दर्शकों के बीच प्रस्तुति देते कलाकार। - फोटो : अमर उजाला

बहुत सुरीले हैं काशीवासी
मथुरा से आए कलाकार हेमंत बृजवासी ने कहा कि काशीवासी बहुत सुरीले हैं। गंगा के किनारे काशीवासियों को संगीत सुनाकर मैं धन्य हो गया। गंगा के पानी में वह बात है कि जो भी पीता है उसके अंदर दिव्यता स्वयं आ जाती है। उसके साथ ही शिव की नगरी काशी का प्रताप ही अलग है।

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