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बनारस में टूटी सैकड़ों वर्ष पुरानी परंपरा, 475 साल में पहली बार नहीं होगा विश्वप्रसिद्ध भरत मिलाप

Tue, 13 Oct 2020 04:53 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Tue, 13 Oct 2020 04:53 PM IST
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Hundreds of years old traditions broken in Banaras first time in 475 years  Bharat Milap will not be happen at Nati imli varanasi
नाटी इमली का भरत मिलाप। - फोटो : अमर उजाला

कोरोना वायरस के कहर का सीधा असर मानव जीवन पर पड़ रहा है। इसके चलते देश में सैकड़ों साल पुरानी सांस्कृतिक परंपराएं भी टूट रही हैं। बनारस में भी कुछ ऐसा ही होने वाला है। नाटी इमली का विश्व प्रसिद्ध भरत मिलाप इस साल नहीं होगा। वहीं 237 साल से होती आ रही रामनगर की रामलीला भी कोरोना की वजह से नहीं हुई।

Hundreds of years old traditions broken in Banaras first time in 475 years  Bharat Milap will not be happen at Nati imli varanasi
- फोटो : अमर उजाला

लक्खा मेले में शुमार है भरत मिलाप
काशी के नाटी इमली में भरत मिलाप मेला लक्खा मेले में शुमार है। रामलीला समिति के प्रबंधक मुकुंद उपाध्याय ने बताया कि लगभग 475 वर्ष पहले यहां रामलीला की शुरुआत भगवान राम के भक्त मेघा भगत ने की थी। 5 मिनट के भरत मिलाप को देखने के लिए लाखों लोग आते हैं। लेकिन, कोरोना वायरस संक्रमण के चलते इस बार इसका स्वरूप सांकेतिक कर दिया गया है। पहली बार ऐसा होगा कि भक्त लीला को देख नहीं पाएंगे।

Hundreds of years old traditions broken in Banaras first time in 475 years  Bharat Milap will not be happen at Nati imli varanasi
फाइल फोटो

दुर्गा पूजा में पहली बार स्थापित नहीं होगी प्रतिमा
अंग्रेजों के जमाने से शुरू हुई काशी की पहली दुर्गा पूजा में ढाई सौ सालों के इतिहास में पहली बार माता की प्रतिमा स्थापित नहीं की जा रही है। केंद्रीय पूजा समिति के अध्यक्ष तिलकराज मिश्र ने बताया कि करीब ढाई सौ साल पहले 1773 ईस्वी में बंगाली ड्योढ़ी से ही बनारस में सबसे पहले दुर्गा पूजा की शुरूआत हुई थी।

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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

पूजा समिति के लोग गंगा की मिट्टी से ही माता की प्रतिमा, गणेश, कार्तिकेय और भगवान राम की प्रतिमाओं का निर्माण करते हैं। कोरोना संक्रमण के कारण इस बार प्रतिमा का निर्माण नहीं हो सका है। इसलिए समिति ने कलश स्थापना करके पूजन का निर्णय लिया है।

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फाइल फोटो

काशी नरेश करते हैं रामलीला का शुभारंभ
237 साल पुरानी रामनगर की रामलीला भी कोरोना की वजह से नहीं हो पाई। रामनगर की रामलीला कब शुरू हुई, इसका कोई स्पष्ट ऐतिहासिक साक्ष्य तो नहीं है, लेकिन कहा जाता है कि काशी नरेश उदित नारायण ने इसे शुरू कराया था। कई लोग रामलीला शुरू होने का समय 1780 के बाद भी मानते हैं।

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