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रंगभरी एकादशी पर भोलेनाथ के दरबार से गलियों तक हर कोना हुआ लाल

Thu, 09 Mar 2017 12:32 PM IST
टीम डिजिटल,वाराणसी
टीम डिजिटल,वाराणसी Updated Thu, 09 Mar 2017 12:32 PM IST
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holi festival start after rangbhari ekadashi at varanasi
rangbhari - फोटो : अमर उजाला
गौरा का गौना कराने निकले काशीपुराधिपति बाबा विश्वनाथ की रजत सिंहासन वाली डोली बुधवार की शाम आस्थावानों के लिए आस्था की निधि बन गई। हर मन में त्रिपुरारी की पालकी का स्पर्श करने की चाह थी। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...
holi festival start after rangbhari ekadashi at varanasi
rangbhari - फोटो : अमर उजाला
गौरा का गौना कराने निकले काशीपुराधिपति बाबा विश्वनाथ की रजत सिंहासन वाली डोली बुधवार की शाम आस्थावानों के लिए आस्था की निधि बन गई। हर मन में त्रिपुरारी की पालकी का स्पर्श करने की चाह थी और उस पर अबीर की बौछार करने की चाहत। शाम पांच बजे महाआरती के बाद बाबा सपरिवार रतज पालकी पर सवार हुए तो हर हर महादेव के जयकारे के साथ रंग बरसने लगे। गली में कतारबद्ध श्रद्धालु डमरूनाद कर रहे थे। 
holi festival start after rangbhari ekadashi at varanasi
rangbhari - फोटो : अमर उजाला
जत सिंहासन वाली डोली पर बाबा सपरिवार सवार होकर निकले तो गलियां अबीर-गुलाल से पट कर लाल हो गईं। छतों, बारजों, गलियों के दोनों किनारों पर कतारबद्ध पुरुषों, महिलाओं, बच्चों ने गुलाब की पंखुड़ियां भी बरसाईं और रंग-बिरंगे गुलाल भी। विश्वनाथ मंदिर के अर्चक डॉ. श्रीकांत मिश्र के साथ अन्य अर्चकों ने डोली उठाई। गली से जब डोली गुजरी तो छतों, बारजों के अलावा हर कोने से अबीर-गुलाल उड़ाए जाने लगे। स्वर्ण शिखरों वाले मुक्तांगन का हर कोना लाल-गुलाल से पट गया। गर्भगृह में महाआरती के बाद बाबा का शृंगार किया गया। 
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holi festival start after rangbhari ekadashi at varanasi
rangbhari - फोटो : अमर उजाला
उस छटा को निहारने के लिए लोकतंत्र के महापर्व के बावजूद काशी की धर्मप्राण जनता उमड़ पड़ी थी। महंत के आवास से स्वर्ण शिखरों वाले मुक्तांगन तक जन सैलाब के सिर से पैर तक गुलाल से रंग जाने से कोई किसी को पहचान भी नहीं पा रहा था। 
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rangbhari - फोटो : अमर उजाला
इसी के साथ होलाष्टक लगने से काशी में होली शुरू हो गई। अब पांच दिन तक घाटों से लेकर गलियों तक होलियाना बहार छाई रहेगी। 
महंत डॉ. कुलपति तिवारी के आवास पर सुबह ही मां पार्वती के हल्दी की रस्म पूरी की गई। महिलाएं साज-शृंगार करने में जुट गईं। मंगलगीत गूंजने लगे।
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