हरतालिका तीज पर गुरुवार को काशी में घरों से लेकर घाटों तक आस्था का उत्सवी माहौल देखते बना। सुबह से ही सजने संवरने में जुटीं महिलाएं। बांहों तक मेहंदी की छटा पर खनकती रंगबिरंगी चूड़ियां। माथे पर बिंदिया और सोलह शृंगार से निखरा रूप। बृहस्पतिवार को अखंड सुहाग, पतियों के दीर्घायु कामना में जहां विवाहिताओं ने व्रत रखा, वहीं कुंवारी कन्याओं ने मनोवांछित वर की प्राप्ति के लिए शिव पार्वती की आराधना की।
बुधवार की मध्यरात्रि से पहले कलेवा कर महिलाओं ने सुबह से ही व्रत रखकर शाम को नदी की चिकनी मिट्टी से बने शिव परिवार का सामूहिक पूजन किया। काशी समेत पूर्वांचल में सनातनी परंपरा का महिलाओं का यह लोकप्रिय व्रत है। आगे की स्लाइड्स में देखें..
2 of 6
हरतालिका तीज पर काशी में आस्था का उत्सवी माहौल
- फोटो : अमर उजाला
संध्या काल, मध्यरात्रि को पूजन कर शिव-गौरा से अखंड सौभाग्य की मंगलकामना की और कथा सुनी। कई घरों में शिव पार्वती के भजन और मंगल गाने के साथ तरह-तरह के पकवानों का भोग शिव-पार्वती को अर्पित किया गया। सुबह से व्रती महिलाओं ने केले के पत्ते से मंडप बनाया और उसमें शिव पार्वती की कच्ची मिट्टी से बनी मूर्ति को स्थापित कर उसका शृंगार किया। उन्हें दूध, दही, घी, मधु, शर्करा और सफेद मिष्ठान का भोग लगाया।
3 of 6
हरतालिका तीज पर काशी में आस्था का उत्सवी माहौल
- फोटो : अमर उजाला
तीज के अवसर पर शहर के मंदिरों में भी महिलाएं दर्शन पूजन के लिए पहुंची। भोजूबीर पंचक्रोशी परिक्रमा मार्ग पर मां दक्षिणेश्वरी काली मंदिर में महिलाओं ने तीज का पूजन किया। मंदिर के महंत राजू गिरी के आचार्यत्व में पूजन संपन्न हुआ।
4 of 6
हरतालिका तीज
- फोटो : अमर उजाला
कई घरों में शिव पार्वती के भजन और मंगल गान के साथ तरह-तरह के पकवानों का भोग शिव-पार्वती को अर्पित किया गया। सुबह से व्रती महिलाओं ने केले के पत्ते से मंडप बनाया और उसमें शिव पार्वती की कच्ची मिट्टी से बनी मूर्ती को स्थापित कर उसका शृंगार किया।
5 of 6
हरतालिका तीज
- फोटो : अमर उजाला
बिरदोपुर निवासी प्रिया ने अपनी देवरानी कविता संग हरतालिका तीज की पूजा घर पर ही उत्साह और उमंग से किया। प्रिया बताती हैं, पिछले साल तीज के पर्व मेें इस तरह का उल्लास नहीं था। इस बार हम दोनों ने एक पूजा की।