अदालत के आदेश के बाद ज्ञानवापी परिसर में शुरू हुई कमीशन की कार्रवाई के दौरान तीन दिन में टीम ने पूरी पड़ताल की और तहखाने के अंदर की बनावट, धार्मिक चिन्ह, दीवारों की कलाकृति और खंभों की फोटो व वीडियोग्राफी भी करवाई। सोमवार को तीसरे और अंतिम दिन की कार्रवाई पूरी होने के बाद कुछ लोगों ने साक्ष्यों को लेकर अपने अपने दावे भी किए।
मगर, टीम को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि सर्वे से जुड़ी कोई भी जानकारी बाहर नहीं आनी चाहिए। ऐसे में सर्वे टीम के किसी भी सदस्य ने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। अब कमीशन की कार्रवाई पूरी होने के बाद न्यायालय में प्रस्तुत होने वाली रिपोर्ट की हकीकत बयां करेगी। सूत्रों के अनुसार एक तहखाने में मगरमच्छ का शिल्प, कमल व स्वास्तिक की आकृति, देख सभी दंग रह गए। तहखाने में मंदिर शिखर का अवशेष भरा होने के कारण सर्वे में दिक्कत भी आई।
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मैदागिन-गोदौलिया मार्ग पर पुलिस का पहरा
- फोटो : अमर उजाला
टीम में शामिल कुछ लोगों ने दावा किया कि ज्ञानवापी की दीवारों और पत्थरों पर कई चिह्न मौजूद हैं। दीवारों पर अंकित आकृतियों की स्थापत्य शैली को रिकॉर्ड में लिया गया। चप्पे-चप्पे की वीडियोग्राफी करवाई गई, लेकिन अंदर क्या मिला है? इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
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ज्ञानवापी मस्जिद
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दावा है कि तहखाने के चारों कमरों में धार्मिक परंपरा से जुड़ी वस्तुएं मिली हैं। पत्थरों पर बनी आकृति को लेकर भी अपने दावे किए जा रहे हैं। स्थापत्य कला के अद्भुत नमूनों के साथ उस वक्त के कारीगरों की उच्च दर्जे की कलाकारी की भी लोग चर्चा करते रहे।
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गोदौलिया-मैदागिन मार्ग आज भी बंद
- फोटो : अमर उजाला
ज्ञानवापी परिसर में सर्वे शुरू होने के साथ ही अफवाहों का बाजार भी गर्माता रहा। शनिवार सुबह मुस्लिम पक्ष की ओर से तहखाने की चाबी नहीं देने की बात आई थी, लेकिन पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों की मौजूदगी में पूरे सद्भाव से सर्वे किया गया है।
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ज्ञानवापी परिसर के बाहर तैनात पुलिस बल
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ज्ञानवापी के सालों से बंद तहखानों में सर्वे करना था, इसलिए टीम बैटरी लाइट लेकर गई थी। इसके अलावा, ताला तोड़ने वाले, सफाईकर्मियों और वन विभाग की टीम भी मौके पर मौजूद रही। परिसर की वीडियोग्राफी के लिए विशेष कैमरा और लाइट की व्यवस्था की गई।