वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में शिवलिंग मिलने के बाद अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। हिंदू पक्ष जहां शिवलिंग का दावा कर रहा है, वहीं मुस्लिम पक्ष इसको फव्वारा बता रहा है। मामला अदालत में है। इस बीच श्री काशी विद्वत कर्मकांड परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष व काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व न्यास अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने कहा कि ज्ञानवापी परिसर का संपूर्ण भूभाग भगवान विश्वनाथ का है। जब तक पूर्वी दीवार नहीं हटेगी, शिवलिंग का पता नहीं चलेगा। दीवार हटते ही ढेर सारे शिवलिंग मिलेंगे।
परिसर के ग्राउंड फ्लोर में पांच फीट चौड़ा और 15 फीट लंबा चबूतरा है। इस पर ढेर सारे शिवलिंग रखे हुए हैं। उसको तो हम लोगों ने अपनी आंखों से देखा था। वजू स्थल के नीचे दालान में अनेकों शिवलिंग मिलेंगे। ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन पूजन व अन्य विग्रहों के सरंक्षण की मांग मामले में अब तक दो सर्वे रिपोर्ट अदालत में सौंपी जा चुकी है। दोनों ही रिपोर्ट में हिंदू धर्म से जुड़े निशानों का जिक्र है।
2 of 8
आचार्य पंडित अशोक द्विवेदी (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
आचार्य अशोक द्विवेदी ने कहा कि कयासों के आधार पर ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग का नाम नहीं रखा जा सकता है। काशी खंड के अनुसार कर्मकांडी समाज और चारों शंकराचार्य इसका निर्णय करेंगे। हमारी तो मुस्लिम समाज से अपील है कि वह दिल बड़ा करें और अपना दावा छोड़ दें। अगर वह ऐसा नहीं करते हैं, तो न्यायालय का जो भी निर्णय होगा, सनातनी हिंदुओं को वह ग्राह्य होगा।
3 of 8
वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी
- फोटो : अमर उजाला
लार्ड विश्वेश्वर शिवलिंग बनाम अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के पुराने केस में कोर्ट द्वारा नियुक्त किए गए वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी ने वजूखाने में मिले शिवलिंग को तारकेश्वर महादेव होने का दावा किया है। उनका कहना है कि जेम्स प्रिंसेप के नक्शे और हिस्ट्री ऑफ बनारस पुस्तक से इसकी पुष्टि होती है। हालांकि मामला कोर्ट में होने के कारण दावे की हकीकत सिद्ध होनी बाकी है।
4 of 8
ज्ञानवापी परिसर में शिवलिंग मिलने के बाद अलग-अलग दावे
- फोटो : अमर उजाला
वादमित्र अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी ने बताया कि वजूखाने में मिला शिवलिंग भगवान विश्वेश्वर का नहीं भगवान तारकेश्वर महादेव का है। ज्ञानवापी के पुराने नक्शे को देखे तो हकीकत सामने आ जाएगी। 1780 में जब जेम्स प्रिंसेप ने बनारस का नक्शा तैयार करवाया था, तो उसमें शहर के हर मंदिर और विग्रहों की स्थिति स्पष्ट तौर पर दर्ज थी। वह नक्शा आज भी इतिहास की किताबों में दर्ज है।
नक्शे को अगर ज्ञानवापी परिसर में रखा जाए तो उसके अनुसार दो छोटे गुंबद के बीच बनाए गए बड़े वाले गुंबद के नीचे भगवान विश्वेश्वर के पुराने मंदिर का शिखर और शिवलिंग मिलेगा। नक्शे में यह भी साफ है कि पूर्वी छोर पर बनाए गए वजू के स्थान पर तारकेश्वर महादेव का मंदिर स्थापित था। जो शिवलिंग मिला है, वह तारकेश्वर महादेव का है, जो भक्तों को तारक मंत्र देते हैं।