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गुरु पूर्णिमा पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने लिया अपने गुरु का आर्शीवाद

Mon, 10 Jul 2017 10:39 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी Updated Mon, 10 Jul 2017 10:39 AM IST
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Guru Purnima Muslim community took their guru blessings in Varanasi
Guru Purnima muslim women in varanasi - फोटो : अमर उजाला

गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश करते हुए वाराणसी में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने अपने गुरु का आर्शीवाद लिया। इस दौरान मुस्लिम महिलाओं ने अपने गुरु की आरती भी उतारी। आगे की स्लाइड में पढ़ें पूरी खबर...

Guru Purnima Muslim community took their guru blessings in Varanasi
Guru Purnima muslim women in varanasi - फोटो : अमर उजाला

महान संत कबीरदास जी ने कहा था, गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पांव, बलिहारी गुरु आपने गोविंद दिये बताय। कबीरदास जी मध्यकालीन धर्म सुधारक रामानंद के शिष्य थे। रामानंद ने धर्म और जाति का भेद खत्म कर ईश्वर की भक्ति का संदेश दिया था।

 

 

 

 

Guru Purnima Muslim community took their guru blessings in Varanasi
Guru Purnima muslim women in varanasi - फोटो : अमर उजाला

कबीरदास जी उन्हीं के शिष्य थे। रामानंद के शिष्य नरहरिदास ने वाराणसी के पातालपुरी मठ की स्‍थापना की थी। गुरु पूर्णिमा के मौके पर पातालपुरी मठ का नजारा बदला-बदला नजर आया। बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग मठ मंहत बालकदास जी के दर्शन के लिए पहुंचे।

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Guru Purnima Muslim community took their guru blessings in Varanasi
Guru Purnima muslim women in varanasi - फोटो : अमर उजाला

मुस्लिम महिला फाउंडेशन की नेशनल सदर नाजनीन अंसारी के नेतृत्व में मुस्लिम महिलाओं ने महंत बालकदास जी की आरती उतारी। उन्हें अंगवस्‍त्रम और गुलाब का फूल देकर आर्शीवाद लिया। नाजनीन ने अपनी उर्दू में लिखी भगवान राम की आरती भी उन्हें भेंट की।

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Guru Purnima Muslim community took their guru blessings in Varanasi
Guru Purnima muslim women in varanasi - फोटो : अमर उजाला

मोहम्मद मजीद के नेतृत्व में मुस्लिम शिष्य भी बाबा बालकदास को सम्मान देने पहुंचे। इस अवसर पर बाबा बालकदास ने कहा कि आज से 500 साल पहले रामानंद जी ने कबीर को शिष्य बनाकर जो परंपरा शुरू की थी, आज वही परंपरा भारत की राष्ट्रीय एकता के लिए जरुरी बन गई है। उन्होंने कहा कि कोई भी भेदभाव नहीं कर सकता है और न ही धर्माचार्य को इंसानों में कोई भेद करना चाहिए।

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