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काशी दौराः जर्मनी के राष्ट्रपति को भेंट किया जाएगा यह खास उपहार, 10 दिन में हुआ तैयार

Thu, 22 Mar 2018 10:38 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,वाराणसी Updated Thu, 22 Mar 2018 10:38 AM IST
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german president will honoured with these special gift in varanasi visit
gigft - फोटो : अमर उजाला
22 मार्च को काशी आ रहे जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रैंक वाल्टर स्टाइनमायर के लिए खास बनारसी उपहार बनकर तैयार है। हाल ही में फ्रांस के राष्ट्रपति जब बनारस आये थे तो यहां मिले उपहार से काफी खुश हुए थे। जर्मनी के राष्ट्रपति को राष्ट्रपति को एक नहीं बल्कि दो उपहार दिया जाएगा। आगे की स्लाइड्स में जानिए...

 
german president will honoured with these special gift in varanasi visit
gift - फोटो : अमर उजाला
महाबोधि सोसाइटी ऑफ  इंडिया सारनाथ के मुख्य भंते जर्मनी के राष्ट्रपति को भेंट करेंगे और उन्हीं के आग्रह पर इसे बनाया गया है।  जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रैंक वाल्टर स्टाइनमायर के काशी आगमन पर ‘बुद्धम शरणं गच्छामि’ पीपल की पत्ती और पंचशील रंग में रंगा अंगवस्त्रम भेंट किया जाएगा। इसके अलावा लकड़ी के ऊपर कार्विंग कर तैयार की गई भगवान बुद्ध की मूर्ति भी उपहार स्वरूप दी जाएगी।
 
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gift - फोटो : अमर उजाला

छाहीं ग्राम के बच्चे लाल मौर्य ने हथकरघा पर अंगवस्त्रम् तैयार किया है। वहीं भगवान बुद्ध की मूर्ति को राम कटोरा निवासी चंद्र प्रकाश विश्वकर्मा बना रहे हैं। यह सारनाथ स्थित बुद्ध की मूर्ति की हूबहू रेप्लिका है  जिसका आकार 12 इंच चौड़ा और 18 इच लंबा है। इसे सात दिन में कड़ी मेहनत से तैयार किया गया है। पूरे परिवार को कैमा की लकड़ी पर कार्विंग की महारथ हासिल है। इनके हाथ की बनी मूर्तियां जापान, कोरिया, वियतनाम, कंबोडिया, चीन, श्रीलंका, थाईलैंड जैसे देशों में निर्यातकों के माध्यम से जाती हैं।
 
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gift - फोटो : अमर उजाला

बच्चेलाल मौर्य ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसी अंगवस्त्रम् से राष्ट्रपति का स्वागत करेंगे। यह जीआई उत्पाद है। हाल ही में गीता के श्लोक का अंगवस्त्रम् 12 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेंट किया गया था। ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन के सहयोग से यह पंचशील का अंगवस्त्रम् 10 दिन के लगातार परिश्रम से कैलीग्राफी विधि से बुनकर तैयार हुआ है। 

 
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फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और पीएम नरेंद्र मोदी - फोटो : twitter
जीआई विशेषज्ञ डॉ. रजनीकांत ने बताया कि एक बार फिर बनारस के शिल्पी और बुनकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना हुनर दिखाएंगे। हाल ही में फ्रांस के राष्ट्रपति ने यहां के जीआई हस्तशिल्पियों को बहुत सराहा है और अब जर्मनी के रास्ते शिल्प और हैंडलूम का बाजार और मजबूत होगा। जर्मनी में भारतीय हस्तशिल्प का बहुत बड़ा निर्यात होता है जिसमें भदोही की कालीन प्रथम स्थान पर है।

 
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