मजदूरों की जान कितनी सस्ती होती है, इसका एक जीता जागता उदाहरण है वाराणसी के कैंट में हुए हादसा। सीवर पाइप लाइन की सफाई करने उतरे दो मजदूरों की जान चली गई। वहीं प्रशासन ने भी रेस्क्यू ऑपरेशन हादसे के काफी देर बाद शुरू किया। अगर ठेकेदार ने मजदूरों को पूरी तैयारी के साथ पाइप के अंदर भेजा होता या उन्हें राहत कार्य समय पर मिला होता तो शायद वे जिंदा होते। वाराणसी में ये अपने तरह का दूसरा हादसा है। देखें आगे की स्लाइड्स में...
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- फोटो : amar ujala
वाराणसी के कैंट थाना क्षेत्र के काली मंदिर के पास एलएनटी द्वारा डाले गए सीवर पाइप लाइनों की सफाई कराने का काम चल रहा है। इसी क्रम में शुक्रवार तड़के चार बजे तीन मजदूरों को सीवर पाइप लाइन की सफाई करने के लिए ठेकेदार ने टैंक में उतार दिया। वाराणसी के शिवपुर के मिनी स्टेडियम निवासी चंदन, बिहार के मोतिहारी निवासी राजेश पासवान और उमेश सीवर लाइन की सफाई के लिए अंदर गए थे। इसके बाद चैंबर की दीवार में सुराख होने से कहीं से पानी रिस रहा था, तभी अचानक दीवार खिसक गई और तीनों मजदूर उसमें फंस गए।
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उमेश ज्यादा नीचे ना होने के कारण बाहर निकल आया, लेकिन चंदन और राजेश उसी में फंस गए। इसके बाद बहुत तेजी से पानी चेंबर में भर गया। उमेश ने तुरंत पुलिस को बताया इसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने एनडीआरएफ की टीम को बुलाया। सीवर के चेंबर में पानी भरने के कारण बचाव कार्य में परेशानी हो रही थी। मौके पर पहुंचे प्रभारी डीएम गौरांग राठी और सीओ डॉ. अनिल कुमार पुलिस टीम के साथ, एनडीआरएफ फोर्स के साथ चेंबर में फंसे सफाई कर्मियों को बचाव में लगे थे।
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हादसे के छह घंटे बाद चेंबर से मलबा और पानी निकाला जा सका। जिसके बाद दोनों मजदूरों का शव निकाला गया। इतना सब होता देख लोगों के मन में काफी गुस्सा था। लोगों ने आक्रोशित हो कर शव को ले जा रही एम्बुलेंस पर भी पथराव किया। बीचबचाव करके पुलिस ने किसी तरह दोनों मजदूरों के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। ठेकेदार की लापरवाही से दो मजदूरों की मौत हो गई। मजदूरों के सीवर में फंसने की जानकारी मिलते ही ठेकेदार मौके से फरार हो गए। गंगा प्रदूषण इकाई द्वारा जल निगम की देखरेख में सीवर पाइप लाइनों की सफाई का कार्य चल रहा था।
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ऐसा ही इसके पहले 10 नवंबर 2018 में वाराणसी में सीवेज प्लग तोड़ने के लिए जल निगम की ओर से पर्याप्त बचाव साधनों के बिना मैनहोल में मजदूर उतारे गए थे। जहरीली गैस से दो मजदूर दिनेश पासवान (27) और उसके भतीजे विकास (18) अचेत हो गए और पानी के तेज बहाव में बह गए, जबकि एक मजदूर सत्येंद्र पासवान बाल बाल बच गया था। बिहार के भगवानपुर निवासी मजदूर सत्येंद्र पासवान ने बताया कि वह अपने साथी दिनेश पासवान और विकास के साथ सीवर चैंबर में नीचे उतरकर प्लग तोड़ने का काम कर रहे थे।