हर साल की तरह इस बार भी वाराणसी में गंगा की तलहटी की उपजाऊ मिट्टी में विभिन्न प्रकार की फसलें विशेषकर रंग-बिरंगे फूलों की खेती हुई है। घाट किनारे टहलने जाने वाले लोग फूलों को देखकर कुछ देर रुके बगैर नहीं जा सकते।
वाराणसी में साकार होने लगा गंगा गांव का सपना, रंग-बिरंगे फूलों को देख हो जाएंगे दीवाने, देखें तस्वीरें
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औषधीय खेती करके फंस गए किसान, नहीं मिल रहे खरीदार
वाराणसी में औषधीय खेती किसानों के लिए मुसीबत बन गई है। खरीदार नहीं मिलने से इसकी खेती करने वाले किसान परेशान हैं। इससे विभाग की कोशिश के बावजूद किसान इस खेती से दूर भाग रहे हैं। जिले में नमामि गंगे के तहत हर्बल खेती और औषधीय पौध मिशन योजना के तहत एलोवेरा, सतावरी तुलसी, लेमन ग्रास, खस घास जैसे कई आयुर्वेदिक औषधीय पौधे लगाने की योजना है।
इसके लिए किसानों को अनुदान देने की भी व्यवस्था है। जिला उद्यान अधिकारी संदीप कुमार गुप्त के मुताबिक पिछले वित वर्ष 2019-20 में औषधीय पौध मिशन योजना के तहत अश्वगंधा, तुलसी, सतावरी, एलोवेरा और कालमेध औषधीय पौध रोपण का लक्ष्य था।
जिसके तहत किसान को प्रति हेक्टेयर लागत पर 30 प्रतिशत अनुदान दिया जाना था। मगर औषधीय खेती करने वाले किसानों के लिए उचित बाजार न मिल पाने से किसानों ने रुचि ही नहीं दिखाई। कुछ किसान है सेवापुरी मधुमतिया में तुलसी की खेती करते हैं।
उधर, वन विभाग का भी नमामि गंगे के तहत जिले के तीन विकास खंड चिरईगांव, आराजीलाइन और काशीविद्यापीठ के अंतर्गत आने वाले गंगा किनारे गांव के 50 हेक्टेयर में हर्बल खेती की योजना है। जिसमें 50 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान हैं।
जिसके तहत किसानों को खस घास, लेमन ग्रास, पामल रोजिया, तुलसी और सतावरी के पौध विभाग की ओर देने के बावजूद भी किसान तैयार नहीं हो रहे। हालांकि विभाग का दावा है कि अभी तक 40 किसानों को हर्बल खेती के लिए तैयार किया है।