अब तक सैकडों फिल्मों में अपने दमदार अभिनय का लोहा मनवा चुके भोजपुरी फिल्मों के मेगास्टार रवि किशन एक समय में पुरुष वेश्या बनने जा रहे थे लेकिन उनके पिता ने उन्हें बचा लिया। इस फादर्स डे पर आगे की स्लाइड में पढ़ें रवि किशन के गांव के छोरे से मेगास्टार बनने की कहानी...
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ravi kishan
- फोटो : social media
रविकिशन का जन्म तो मुंबई के सांताक्रूज इलाके में एक छोटी सी चाल में हुआ था लेकिन वे मूल रुप से जौनपुर के रहने वाले हैं। उनके पिता पंडित श्याम नारायण शुक्ला का मुंबई में पुरोहित हैं और उनका डेयरी का छोटा सा बिजनेस था।
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- फोटो : अमर उजाला
रविकिशन जब10 साल के थे तब उनके पिता का उनके चाचा के साथ विवाद हो गया और धंधा बंदकर दोनों को जौनपुर लौटना पड़ा। रविकिशन यहां करीब सात साल तक रहे लेकिन पढ़ाई में उनका मन नहीं लगता था। उन्हें मुंबई की याद आती थी।
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रविकिशन के परिवार को बेहद गरीबी में दिन गुजारने पड़ रहे थे। वे मिट्टी के बने घर में रहते थे। एक समय ऐसा आया जब रविकिशन या तो मरने या गुंडा बनने की सोचने लगे थे। तभी उन्होंने महानायक अमिताभ बच्चन का डायलॉग सुना...मैं फेंके हुए पैसे नहीं लेता।
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इस डायलॉग ने उनका जीवन बदल दिया। पिता जी उन्हें जबरन डेयरी बिजनेस कराना चाहते थे लेकिन उनकी मां ने 500 रुपये दिए और रविकिशन जौनपुर से मुंबई चले गए। रवि किशन ने एक इंटरव्यू में बताया कि भोजपुरी फिल्मों जाने की सलाह भी उनकी मां ने ही दिया था।