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जन्मदिन विशेष: इतिहास के पन्नों से अधिक प्राचीन है वाराणसी, आज ही के दिन मिली थी आधिकारिक मान्यता

Mon, 24 May 2021 02:10 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Mon, 24 May 2021 02:10 PM IST
सार

1965 में प्रकाशित वाराणसी गजेटियर के दसवें पृष्ठ पर जिले का प्रशासनिक नाम वाराणसी किए जाने की तिथि 24 मई 1956 अंकित है। यह महज संयोग है कि उक्त तिथि को भारतीय पंचांग में दर्ज तिथि के अनुसार वैसाख पूर्णिमा और चंद्रग्रहण का योग था। 

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Birthday special History of Varanasi is more ancient than pages of history today get Official recognition
बनारस शहर। - फोटो : अमर उजाला।

वाराणसी का वास्तविक इतिहास शायद इतिहास के पन्नों से भी अधिक प्राचीन है। यह विश्व के प्राचीन नगरों में से एक है। पुराणों के अनुसार मनु से 11वीं पीढ़ी के राजा काश के नाम पर काशी बसी। 24 मई को गजट के अनुसार वाराणसी अपना 65वां जन्मदिन मनाएगी।



प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. संपूर्णानंद ने वाराणसी को 24 मई 1956 को आधिकारिक मान्यता प्रदान की थी। 1965 में प्रकाशित वाराणसी गजेटियर के दसवें पृष्ठ पर जिले का प्रशासनिक नाम वाराणसी किए जाने की तिथि 24 मई 1956 अंकित है। यह महज संयोग है कि उक्त तिथि को भारतीय पंचांग में दर्ज तिथि के अनुसार वैशाख पूर्णिमा और चंद्रग्रहण का योग था। 

स्कंद पुराण के काशी खंड में नगर की महिमा 15 हजार श्लोकों में कही गई है। मत्स्य पुराण में भगवान शिव वाराणसी का वर्णन करते हुए कहते हैं वाराणस्यां नदी पु सिद्धगन्धर्वसेविता। प्रविष्टा त्रिपथा गंगा तस्मिन क्षेत्रे मम प्रिये।। अर्थात हे प्रिये, सिद्ध गंधर्वों से सेवित वाराणसी में जहां पुण्य नदी त्रिपथगा गंगा बहती है वह क्षेत्र मुझे प्रिय है।

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बनारस बार के पूर्व महामंत्री और काशी के इतिहास पर शोध कर रहे अधिवक्ता नित्यानंद राय ने बताया कि पुराणों में वर्णित है कि काशी नगर की स्थापना भगवान शिव ने लगभग पांच हजार साल पूर्व की थी। इसे कासिनगर और कासिपुर के नाम से भी जाना जाता था।
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सम्राट अशोक के समय में इसकी राजधानी का नाम पोतलि था। जातक कथाओं के अनुसार ही इसका एक नाम रामनगर भी है। एक ऐसा शहर जहां सब कुछ सुंदर और आनंददायक है।
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दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती, गंगा घाट और बनारस की गलियां। - फोटो : अमर उजाला
पतंजलि के महाभाष्य अष्टाध्यायी के सूत्र पतंजलि में लिखा है वणिजो वाराणसी जित्वरीत्युपाचरन्ति... अर्थात ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी में व्यापारी लोग वाराणसी को जित्वरी नाम से पुकारते थे। जित्वरी का अर्थ है जयनशीला अर्थात जहां पहुंचकर पूरी जय अर्थात व्यापार में पूरा लाभ हो। 
 
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वाराणसी एयरपोर्ट, कैंट रेलवे स्टेशन और संकटमोचन मंदिर। - फोटो : अमर उजाला
अमेरिकी लेखक मार्क ट्वेन ने भी लिखा है कि बनारस इतिहास से भी पुरातन है। नित्यानंद राय ने बताया कि सबसे प्राचीन उपनिषद जाबालोपनिषद में काशी को अविमुक्त नगर कहा गया है। काशी शब्द सबसे पहले अथर्ववेद की पैप्पलाद शाखा से आया है और इसके बाद शतपथ में भी उल्लेख है।
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