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बनारस में इन जगहों पर चाहते हैं घूमना तो लेनी पड़ेगी टिकट, विभाग ने जारी किया गजट नोटिफिकेशन
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Published by: Sayali Maurya
Updated Fri, 15 Feb 2019 10:23 AM IST
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- फोटो : demo
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उत्तर प्रदेश का वाराणसी शहर खुद में एक बहुत बड़ा पर्यटन स्थल है। पर्यटन विभाग(tourism department) के 2010 के आंकड़ों के अनुसार हर साल काशी में 2,19,088 पर्यटक घूमने आते है। जिसमें सबसे ज्यादा विदेशी पर्यटक सारनाथ(sarnath) जाते है। इसे देखते हुए पर्यटन विभाग(tourism department) धरोहरों को लेकर एक खास कदम उठाने जा रहा है। जानें आगे की स्लाइड्स में...
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sarnath museum
- फोटो : अमर उजाला
अब तक सारनाथ में संग्रहालय(sarnath museum) , धम्मेख स्तूप वाला उत्तखनित स्थल और मानमहल में वेधशाला देखने का ही शुल्क लगता है। भारतीयों से 25 रुपये और विदेशी नागरिकों से 300 रुपये लिए जाते हैं। चौखंडी स्तूप और राजघाट में लाल खां का रौजा लोग बिना शुल्क के ही देखते रहे हैं।
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मानमहल में वेधशाला
- फोटो : self
जल्दी ही सारनाथ(sarnath) क्षेत्र में स्थित चौखंडी स्तूप और राजघाट स्थित मालवीय ब्रिज के पास लाल खां का रौजा देखने के लिए पैसे खर्च करने पड़ेंगे। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) की ओर से जारी एक आदेश के बाद वाराणसी में पांच ऐसी जगहें होने जा रही हैं, जिन्हें देखने के लिए टिकट लेना पड़ेगा।
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चौखंडी स्तूप
- फोटो : amar ujala
लाल खां का रौजा ऐतिहासिक है। लाल खां काशी नरेश परिवार के सेनापति थे। उनकी वीरता के मद्देनजर मकबरे का निर्माण 1773 के करीब काशी नरेश के परिवार ने कराया था। 1940 और 1960 में हुई खुदाई में पता चला कि छठवीं सदी में प्राचीन काशी इसी क्षेत्र में आबाद थी। यहां मिट्टी की मुहर मिली थीं, जिस पर वाराणसी लिखा था।
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लाल खां का रौजा
- फोटो : amar ujala
दूसरी तरफ गुप्त काल में सम्राट अशोक द्वारा निर्मित चौखंडी बौद्ध स्तूप चारों ओर से अष्टभुजीय मीनारों से घिरा हुआ है। ठोस ईंटों से कुर्सी के रूप में बना यह स्तूप तीन मंजिल की तरह दिखता है, जो ठोस ईंटों से तैयार किया गया है। यहां विश्व भर से बौद्ध अनुयायी आते हैं।
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