अमर उजाला की ओर से सोमवार को नगर के लोहिया तालाब स्थित डैफोडिल पब्लिक स्कूल में स्व. मुरारीलाल माहेश्वरी स्मृति मंडल स्तरीय वाद विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें आयुष सिंह ने प्रथम स्थान हासिल किया जबकि शिवांगी मिश्रा को द्वितीय स्थान से संतोष करना पड़ा। प्रतियोगिता में मिर्जापुर, सोनभद्र, भदोही के 9 प्रतिभागियों में से आठ प्रतिभागी शामिल हुए। मुख्य अतिथि कमिश्नर आनंद कुमार सिंह और डीआईजी पीयूष श्रीवास्तव ने विजेताओं को चेक और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
2 of 10
murari lal maheshwari debate competition in mirzapur
- फोटो : murari lal maheshwari debate competition in mirzapur
प्रतिभागियों ने सोशल मीडिया पर प्रतिबंध देश हित में जरूरी विषय पर पक्ष और विपक्ष में अपनी बातों को जोरदार तरीके से रखा। प्रतिभागियों की तार्किक बातों व शेरो-शायरी पर दर्शक दीर्घा में बैठे स्कूल के छात्रों की तालियों से परिसर गुंजायमान रहा। कमिश्नर और डीआईजी ने दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
सबसे पहले सोनभद्र की नेहा पांडे ने विषय के पक्ष पर अपना विचार रखा। इसके बाद सात प्रतिभागियों ने विषय के विपक्ष पर अपनी बातों को दमदार तरीके से प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता में मिर्जापुर के आयुष सिंह प्रथम, शिवांगी मिश्रा दूसरे, तमन्ना पांडे तीसरे स्थान पर रहे। खुशबू पांडे व प्रिया उपाध्याय को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया।
मुख्य अतिथि आयुक्त आनंद कुमार सिंह व डीआईजी पीयूष श्रीवास्तव ने प्रथम पुरस्कार विजेता आयुष सिंह को सात हजार का चेक व प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। इसी तरह दूसरे स्थान पर रही शिवांगी को पांच हजार, तीसरे स्थान पर रही तमन्ना पांडे को तीन हजार रुपये का चेक व सांत्वना पुरस्कार के रूप में खुशबू साहू व प्रिया उपाध्याय को डेढ़ हजार रुपये का चेक प्रदान किया गया। संचालन संजय सिंह गहरवार ने किया। अतिथियों का स्वागत डैफोडिल्स पब्लिक स्कूल के निदेशक अमरदीप सिंह ने किया।
शुरू से ही जोश में रहे प्रतिभागी :
मंडल स्तरीय कार्यक्रम होने के कारण सभी प्रतिभागी अपनी पूरी ऊर्जा और तैयारी के साथ प्रतियोगिता में शामिल होने आए थे। प्रतियोगिता का आरंभ करते हुए जब पहली प्रतिभागी नेहा पांडेय ने विषय के पक्ष में अपनी बात रखी तो ऐसा लगा कि उसकी बात एकदम सत्य है लेकिन जब दूसरे प्रतिभागियों ने विषय के विपक्ष में अपनी बात रखी तो यह धारणा समाप्त हो गई। प्रतिभागियों की बातों को सुनकर सभागार में बैठे श्रोता मनन करने पर विवश हो जा रहे थे।