हापुड़ की फैक्टरी में हुए दर्दनाक हादसे के बाद सोमवार सुबह शाहजहांपुर के कांट ब्लॉक के भंडेरी गांव में रहने वाले आठ लोगों के शव लाए गए। अपनों के शव देखकर गांव में कोहराम मच गया। परिजन की चीखें सुनकर सभी का कलेजा कांप उठा। गांव में पहुंचे डीएम उमेश प्रताप सिंह और एसपी एस. आनंद ने शोकसंतप्त ग्रामीणों से बातचीत की और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।
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Hapur Factory Blast: शाहजहांपुर में एक साथ जलीं आठ चिताएं, कांप उठा देखने वालों का कलेजा
Mon, 06 Jun 2022 02:32 PM IST
प्राची प्रियम
अमर उजाला नेटवर्क, शाहजहांपुर
अमर उजाला नेटवर्क, शाहजहांपुर
Published by: प्राची प्रियम
Updated Mon, 06 Jun 2022 02:32 PM IST
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रोते बिलखते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
रोते बिलखते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
ददरौल क्षेत्र के भाजपा विधायक मानवेंद्र सिंह भी गांव पहुंचे। विधायक के खिलाफ ग्रामीणों में गुस्सा दिखाई दिया। विधायक ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि उनके स्तर से हर संभव मदद की जाएगी। ग्रामीण मृतक के परिजन को दो लाख रुपये मुआवजा दिए जाने से संतुष्ट नहीं दिखे। इसके बाद कोलाघाट पर शवों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
रोते बिलखते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
मालूम हो कि चार जून को हापुड़ की पटाखा फैक्टरी में विस्फोट में भंडेरी गांव के सर्वेश, अनिल उर्फ छोटे, भूरे, रामू, अनूप, प्रेमपाल, इरफान, छविराम, नूर हसन और राघवेंद्र की मृत्यु हो गई थी। इरफान और नूरहसन को हापुड़ में ही दफना दिया गया था।
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रोते बिलखते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
जिस फैक्टरी में ये मजदूर काम करते थे वहां खिलौना बंदूकों के लिए मिसाइल की तरह दिखने वाले पटाखे बनाए जा रहे थे। इनमें बारूद का इस्तेमाल किया जाता है। पटाखा बंदूक से निकलने के बाद थोड़ी दूर पर जाकर तेज आवाज के साथ फट जाता है। इन पटाखों को बनाने के लिए बड़ी मात्रा में बारूद और अन्य रसायन एक ही जगह रखे हुए थे। इसी दौरान धमाका हुआ, जिसमें बारूद के साथ फटे पटाखे मजदूरों के शरीर में तीन इंच तक घुस गए थे।
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रोते बिलखते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला कि फैक्टरी में हुए धमाके में कई मजदूर तो 100 फीसदी तक झुलस गए थे। उनके शरीर का कोई अंग ऐसा नहीं है जो सलामत बचा हो। कई लोगों के साथ तो ऐसा हुआ कि धमाके के कारण उनके शरीर में पटाखे तीन इंच अंदर तक घुस गए। वहीं, सभी की मौत की सामान्य वजह यह थी कि भीषण आग की वजह से उनकी सांस की नलियां सिकुड़ गई थीं।