सिद्धपीठ शाकंभरी में वर्ष भर में तीन मेले आयोजित होते हैं। इनमें सबसे बड़ा मेला शारदीय नवरात्र पर आयोजित होता है। जिसका आयोजन जिला पंचायत द्वारा किया जाता है। इस बार यह मेला 26 सितंबर को प्रथम शारदीय नवरात्र से प्रारंभ होकर नौ अक्तूबर पूर्णिमा तक चलेगा। मेले का बाजार भी बरसाती शाकंभरी खोल में ही लगता है।
इसके बावजूद श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए यहां कोई व्यवस्था शासन-प्रशासन के स्तर पर नहीं की जाती है। हर साल बरसात के मौसम में आने वाली बाढ़ श्रद्धालुओं के साथ ही दुकानदारों को जानी और माली नुकसान पहुंचाती है।
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शाकंभरी देवी क्षेत्र में उफान पर नदियां
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बेहट निवासी रोहित वितराना का कहना है कि शांकभरी देवी करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और रोजाना हजारों श्रद्धालु मां के दर्शन करते हैं, लेकिन सरकार की ओर कोई सुविधा यहां पर उपलब्ध नहीं है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
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पानी में फंसे वाहन।
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बाढ़ में बह जाते हैं हर साल कई वाहन
गांव नागल माफी के पूर्व प्रधान संजय कुमार का कहना है कि प्रत्येक वर्ष सिद्धपीठ में आने वाली बाढ़ में काफी श्रद्धालुओं के वाहन बह जाते हैं। पिछले वर्षों में तो एक दुकानदार की मौत हो गई थी लेकिन उसके बाद भी शासन-प्रशासन की तरफ से बाढ़ से बचाव हेतु श्रद्धालुओं के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
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तीनों बेटियों को किसी तरह बचाया।
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खोल में कराया जाए पुल का निर्माण
धर्मेंद्र चौहान का कहना है कि शाकंभरी देवी पश्चिमी उत्तर प्रदेश का विख्यात सिद्धपीठ है। बरसात के मौसम में कब खोल में पानी का सैलाब आ जाए, इसकी कोई जानकारी नहीं होती है। प्रदेश सरकार द्वारा शाकंभरी खोल में पुल का निर्माण कराया जाना चाहिए।
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सीएम योगी।
- फोटो : अमर उजाला।
मुख्यमंत्री से मिल कर मांगेंगे विशेष पैकेज
गांव रामपुर बड़कला के ग्राम प्रधान संजय चौधरी का कहना है कि सिद्धपीठ शाकंभरी देवी उनकी ग्राम पंचायत के अंतर्गत ही आता है। वह जल्द ही मुख्यमंत्री आदित्यनाथ से मुलाकात कर श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए विशेष पैकेज की मांग करेंगे।