केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव आईएएस लव अग्रवाल के छोटे भाई एवं युवा उद्यमी अंकुर अग्रवाल की मौत से परिवार में कोहराम मचा है। वहीं परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। उधर, पुलिस ने भी मौत का कारण जानने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है। लेकिन परिवार के लोगों ने पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया था, जिसकी वजह से पुलिस के लिए खुलासा करना बड़ी चुनौती होगा।
आईएएस के भाई ने आखिर क्यों उठाया खौफनाक कदम, उठ रहे ये बड़े सवाल, जल्द खुलेगा राज
उठ रहे कई बड़े सवाल
इतना बड़ा नाम, कारोबार और रुतबा। फिर अंकुर ने क्यों उठाया यह कदम। सहारनपुर शहर के दिल्ली रोड स्थित ग्रीन पार्क से लेकर जिला अस्पताल में मौजूद रहे पड़ोसियों और अन्य लोगों की जुबां पर यही सवाल था। खुदकुशी की वजह को लेकर कारोबार में उतार चढ़ाव से बने तनाव सहित अन्य चर्चाएं जरूर रहीं, लेकिन परिवार के लोग कुछ भी स्पष्ट बताने से इनकार करते रहे।
ऐसे मिली जानकारी
सरसावा थाना पुलिस को सोमवार अपराह्न करीब तीन बजे परिजनों ने कॉल कर सूचना दी कि अंकुर दोपहर 12 बजे फैक्टरी गए थे, लेकिन उसके बाद फोन पर संपर्क नहीं हो रहा है। पुलिस ने छानबीन शुरू की और अंकुर के मोबाइल फोन की लोकेशन निकलवाई जो पिलखनी औद्योगिक क्षेत्र में मिली। पुलिस ने औद्योगिक क्षेत्र में पहुंचकर छानबीन कराई तो अंकुर का शव उनकी फैक्टरी के पास ही खेत में मिला। शव के पास ही लाइसेंसी पिस्टल भी था। अंकुर के पिता केजी अग्रवाल चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं। पिलखनी औद्योगिक क्षेत्र में प्रथम मेटल के नाम से इनकी फैक्टरी है।
जिला अस्पताल में परिवार से जुड़े और कुछ अन्य लोगों ने बताया कि कुछ समय से अंकुर परेशान तो लगे, मगर वे ऐसा कदम उठा लेंगे, इसका अंदाजा नहीं था। वहां मौजूद लोगों में आर्थिक स्थिति के कारण ऐसा करने और इससे पहले भी एक बार खुदकुशी का प्रयास करने की चर्चा रही। यह भी चर्चा रही कि कुछ दिन पहले ही जीएसटी की एसआईबी ने इनकी फैक्टरी पर सर्वे किया था, जिसमें कई लाख रुपये का टैक्स लगाया था। वहीं, शव का पंचनामा भरवाने वालों में शामिल रहे विकास अग्रवाल ने कहा कि अंकुर ने आत्महत्या की है। उन्हें किसी पर कोई शक नहीं है और न ही परिवार कोई कार्रवाई चाहता है।
बेटे के नाम पर है पिलखनी में फैक्टरी
उद्यमी अंकुर अग्रवाल की पिलखनी में फैक्टरी उनके बेटे प्रथम के नाम पर है। इसमें बैटरी से जुड़ा काम किया जाता है। ग्रीन पार्क कॉलोनी में उनके आवास पर कुछ पड़ोसियों ने बताया कि अंकुर अक्सर दिन में 11 से 12 बजे के आसपास यहां से निकलते थे। सोमवार को भी दोपहर में ही गए थे। इसके बाद वे तो नहीं लौटे उनका शव ही यहां पहुंचा। वे हैरान रहे कि यह सब कैसे हो गया।