सहारनपुर जनपद फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों का गढ़ बन चुका है। एटीएस और पुलिस की कार्रवाई में इसका खुलासा हुआ है। भोपाल में पकड़े गए संदिग्ध आतंकियों ने सहारनपुर से आधार कार्ड, पहचान पत्र और पैन कार्ड फर्जी नामों से बनवाए। इसी तरह एक गिरोह बैंकों को 15 करोड़ से अधिक की चपत लगा चुका है, जिसने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कई बैंकों से ऋण लिया।
चार बड़े मामले: पुलिस की कार्रवाई में खुलासा, फर्जी दस्तावेज तैयार करने का गढ़ बना सहारनपुर, पढ़िए पूरी रिपोर्ट
केस - 1
भोपाल एसटीएस ने दो दिन पूर्व संदिग्ध चार आतंकियों को पकड़ा है, जिन्होंने सहारनपुर से फर्जी नाम से आधार कार्ड, पहचान पत्र, पैन कार्ड बनवाना स्वीकार किया है। इसी तरह फरवरी में एकता कॉलोनी से पकड़े गए बांग्लादेशी पिता-पुत्र ने भी सहारनपुर में रहते हुए फर्जी नामों से आधार कार्ड और पहचान पत्र बनवाए थे।
केस - 2
जनवरी माह में नगर कोतवाली पुलिस ने साकिब निवासी पुरानी मंडी, मोहम्मद नवाज निवासी कंबोह का पुल व गुलफाम उर्फ शानू निवासी मोहल्ला सब्जी मंडी मुजफ्फरनगर को पकड़ा था। इन्होंने जोगियान पुल स्थित बैंक से फर्जी दस्तावेज के आधार पर 20 लाख लोन लिया था। इसके अलावा कई बैंकों से इसी तरह ऋण लेकर हड़पने की बात स्वीकार की।
केस - 3
फरवरी माह में नगर कोतवाली पुलिस ही ने रजत कुमार पुत्र क्रेशन गांव छपरेड़ी कोतवाली रामपुर मनिहारान को गिरफ्तार किया। इस आरोपी ने अपने गिरोह के करीब पांच सदस्यों के साथ मिलकर केनरा बैंक की कई शाखाओं से 47 लाख रुपये का ऋण लिया। रजत के हिस्से में 13 लाख रुपये आए थे। पुलिस ने चार लाख रुपये आरोपी के खाते में फ्रीज कराए हैं, लेकिन इसके साथी अभी पकड़े नहीं गए। इसी तरह यह गिरोह 15 करोड़ से अधिक का ऋण ले चुका था।
केस- 4
वर्ष 2008 में पटियाला पुलिस ने हकीकतनगर से पाकिस्तान जासूस इकबाल भट्टी को गिरफ्तार किया था, जो सहारनपुर में कई वर्षों से रहा रहा था। उसने देवराज सहगल के नाम से फर्जी दस्तावेज तैयार करके भारत की नागरिकता भी प्राप्त कर ली थी। इसमें सरकारी तंत्र की मिलीभगत भी सामने आई थी। सरकारी कर्मचारियों को भी नामजद किया गया था।