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सफलता: माता-पिता का छूटा साथ, क्रिकेट छोड़ बेचना चाहते थे कपड़े, ऐसी है अंडर-19 कप्तान अमान के संघर्ष की कहानी

Mon, 02 Sep 2024 01:08 PM IST
डिंपल सिरोही न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: डिंपल सिरोही Updated Mon, 02 Sep 2024 01:08 PM IST
सार

सहारनपुर जनपद के मोहम्मद अमान को घरेलू क्रिकेट में लगातार उम्दा प्रदर्शन का इनाम अंडर-19 का कप्तान बनाकर उन्हें बीसीसीआई ने दिया है।

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Mohd Amaan struggle story, was looking for a job after his fathers death, gets Under-19 captaincy
मोहम्मद अमान - फोटो : अमर उजाला

जिस दिन से चला हूं मेरी मंजिल पे नजर है, आंखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा,


ये फूल मुझे कोई विरासत में नहीं मिले हैं, तुमने मेरा कांटों भरा बिस्तर नहीं देखा।''
शायर बशीर बद्र की ये पंक्तियां अंडर-19 क्रिकेट टीम के कप्तान बनाए गए मोहम्मद अमान की जिंदगी और संघर्ष पर सटीक बैठतीं हैं। पांच वर्षों में अमान ने जिंदगी का सबसे बुरा समय भी देख लिया और सबसे अच्छा भी।

अमान की सफलता पर आज पूरा जनपद गौरवान्वित महसूस कर रहा है, लेकिन अमान इस मुकाम तक कैसे पहुंचे। उन्हें किस दौर से गुजरना पड़ा यह कम ही लोग जानते हैं। पहले 14 वर्ष की उम्र में कोरोना काल में मां साहिबा को खोने के ठीक दो साल बाद पिता मेहताब का साया भी सिर से उठ जाने के बाद किसी के भी लिए संभलना बेहद मुश्किल था। 

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अमान की बहन - फोटो : अमर उजाला

अमान की छोटी बहन शीबा और बुआ शबनम ने बताया कि जिस समय पिता मेहताब दिल की बीमारी से जूझ रहे थे, उस समय अमान नोएडा में कोचिंग ले रहे थे।

पिता की मौत से दो दिन पहले ही अमान नोएडा से लौटे थे। अमान अपनी किट कंधे पर लादकर घर से एसबीबीए एकेडमी के लिए निकल ही रहे थे कि पिता ने अमान को रोक लिया। और बोले, कि अमान ऐसा लग रहा कि आज मेरा आखिरी दिन है। 

अमान ने सोचा कि शायद उसके पिता मजाक कर रहे हैं और उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि यदि आखिरी दिन है तो क्या कलमा पढ़वा दें? इस पर पिता ने हामी भर दी। बुआ शबनम बताती हैं कि कलमा पढ़ते ही पिता मेहताब फर्श पर लेट गए और हमेशा के लिए दुनिया से रुखसत हो गए।

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अमान के कोच राजीव - फोटो : अमर उजाला

मां-पिता को याद कर रो पड़े अमान
अंडर-19 भारतीय क्रिकेट टीम का कप्तान बनने के बाद मोहम्मद अमान अपनी मां और पिता को याद कर रो पड़े। बातचीत में अमान का दर्द बाहर निकल आया। उनका कहना था कि यदि आज उनकी मां और पिता होते तो कितने खुश होते। अमान ने अपनी मां से जिद कर पहला बल्ला 1100 रुपये का खरीदा था। 

मोहम्मद अमान ने क्रिकेट की शुरुआत 2014 में की थी। घर के आर्थिक हालात ठीक नहीं थे, लेकिन मन में क्रिकेटर बनने की धुन थी। 

ऐसे में उन्होंने अपनी मां साहिबा और पिता मेहताब से क्रिकेट की कोचिंग लेने की जिद की। मां और पिता ने कोचिंग के लिए एकेडमी भेजने की हामी तो भर दी, लेकिन सामान खरीदने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं था। अमान बताते हैं कि आज उनकी किट में महंगे से महंगे बल्ले हैं, लेकिन माता और पिता नहीं हैं। 

उन्होंने बताया कि मां का दिलाया हुआ वह बल्ला उनके लिए आज भी सबसे कीमती और खास है। फोन पर हुई बातचीत में उन्होंने यहां तक पहुंचने के लिए सबसे बड़ा श्रेय सहारनपुर जिला क्रिकेट एसोसिएशन के चेयरमैन मोहम्मद अकरम को दिया, जो उनके अभिभावक की तरह हर कदम पर उनके साथ खड़े रहे, साथ ही वह अपने कोच राजीव गोयल को भी नहीं भूले। 

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शॉट लगाते अमान। - फोटो : अमर उजाला

भूतेश्वर क्रिकेट ग्राउंड से की थी शुरुआत 
मोहम्मद अमान के क्रिकेट कॅरिअर की शुरुआत सहारनपुर के भूतेश्वर क्रिकेट ग्राउंड से हुई। यहां राजीव गोयल से उन्होंने क्रिकेट की शुरुआती कोचिंग ली। एसोसिएशन के चेयरमैन मोहम्मद अकरम ने इनको अच्छे प्रशिक्षण के लिए बाहर भेजा। मोहम्मद अमान 2016-17 में अंडर-14, 2017-18 अंडर-14, 2018-19 में अंडर-16, 2019-20 में-अंडर 16 और 2022-23 में अंडर-19 क्रिकेट खेल चुके हैं।

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क्रिकेटर्स - फोटो : अमर उजाला

अमान को आदर्श मानने लगे हैं नवोदित खिलाड़ी
एक साधारण का लड़का, जिसकी लंबाई करीब 5.3 इंच लगातार मेहनत के दम पर भारतीय अंडर-19 क्रिकेट टीम का कप्तान बन जाता है। यह देखकर एसबीबीए एकेडमी के नवोदित खिलाड़ी काफी प्रभावित हैं। रविवार को एसबीबीए क्रिकेट एकेडमी में नवोदित खिलाड़ियों ने अपने अमान की सफलता का जश्न मनाया। कोच राजीव गोयल उर्फ टप्पू की ओर से सभी खिलाड़ियों को मिठाई बंटवाई गई।

एकेडमी के खिलाड़ी साहस ने बताया कि वह कई साल से अमान को एकेडमी में देख रहे हैं और अमान की तरह मेहनत करने का प्रयास करते हैं। साहस को लगता है कि यदि अमान भारतीय टीम के कप्तान बन सकते हैं तो वह भी उनके आसपास तक पहुंच सकते हैं। अभिषेक ने बताया कि अमान भाई जिस तरह से कई कई घंटे पसीना बहाते हैं वह उसके और उसके जैसे सभी जूनियर खिलाड़ियों के लिए सीखने वाली बात है।

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