मुजफ्फरनगर में वारदात को हादसा दर्शाने की साजिश रची गई थी। पहले पुलिस जांच और फिर अदालत में अभियोजन की ओर से रखे गए मजबूत तथ्यों से खौफनाक साजिश का खेल खुला था। जिस जीप में आठ लोग सवार थे, उसका आगे का हिस्सा पूरी तरह सुरक्षित था। ट्रक ने साइड से टक्कर मारकर जीप सवारों को कुचला था।
अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में तथ्य पेश किया गया कि सामूहिक हत्याकांड से पहले बरेली जेल से विक्की त्यागी, जिला जेल से सुशील शुक्ला, अजय शुक्ला और धर्मेंद्र अदालत पहुंचे थे। यहां पर उन्हें मीनू त्यागी, बॉबी त्यागी, बॉबी शर्मा मिले। वारदात की साजिश रची गई, जिसके बाद एक ट्रक खरीदा गया।
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आरोपियों को ले जाती पुलिस।
- फोटो : amar ujala
वारदात के दिन से पहले ही ट्रक रोहाना मार्ग के पास खड़ा कर दिया गया था। उदयवीर सिंह अपने परिवार के साथ जीप में सवार होकर घर से निकले तो ट्रक में सवार आरोपी भी हरकत में आ गए। बड़कली मोड़ के पास ट्रक ने जीप में टक्कर मारी।
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आरोपियों को ले जाती पुलिस।
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वहीं अभियोजन पक्ष ने विधि विज्ञान प्रयोगशाला के वैज्ञानिक को गवाही के लिए अदालत में पेश किया, जहां वैज्ञानिक ने जांच के तथ्य पेश किए और बताया कि जीप के अगला हिस्सा सही था। साइड से टक्कर मारी गई थी।
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सामूहिक हत्याकांड।
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ट्रक के टायरों में घुट गई थी बच्चों की चीख
वारदात में वादी ब्रजवीर सिंह के बेटे गौरव वीर का पूरा कुनबा खत्म हो गया था। गौरव वीर, उसकी पत्नी कल्पना, चार साल के बेटे प्रणव और दो साल के बेटे वंश की भी मौत हो गई थी। उदयवीर चेयरमैन के छह साल के पौत्र दक्ष की भी मौत हुई थी। वारदात में तीन बच्चों की हत्या से हर कोई सहम गया था। जिस ट्रक से सामूहिक हत्याकांड की वारदात अंजाम दी गई थी, उसे चला रहे उपेंद्र की कोरोना संक्रमण के कारण मौत हो चुकी है।
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गांव में खाली पड़ मकान।
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कचहरी में रहा पुलिस का कड़ा पहरा
सामूहिक हत्याकांड के फैसले के दौरान कचहरी परिसर में पुलिस का कड़ा पहरा रहा। एसएसपी विनीत जायसवाल के निर्देश पर पुलिस ने चेकिंग अभियान चलाया। मीनू त्यागी को छोड़कर नामजद अन्य अभियुक्त जमानत पर थे। फैसले की घड़ी आई तो सुनवाई के लिए अदालत पहुंचे। दोष सिद्ध होते ही पुलिस ने आरोपियों को हिरासत में लेकर कठघरे में खड़ा कर दिया। इसके बाद सजा सुनाई गई। जेल जाते हुए अधिकतर आरोपी बेखौफ नजर आए।