किसानों के हक में हर क्षण संघर्ष के लिए तैयार भाकियू सुप्रीमो चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के प्रति मुलायम सिंह यादव का रुख हमेशा दोस्ताना रहा। चाहे वह सूबे के सीएम रहे हों या विपक्ष की भूमिका में, उन्होंने बाबा टिकैत को बेहद गंभीरता से सुना और किसानों की समस्याओं के निस्तारण पर सहमति जताई।
भाकियू के संस्थापक चौधरी टिकैत से वैसे तो देश के बड़े-बड़े राजनीतिज्ञों की उठापटक रही, लेकिन मुलायम सिंह यादव को लेकर उनका रुख कभी कड़क नहीं रहा। जब भी दोनों मिले तो गहरी आत्मीयता दिखाई। किसानों के लिए नि:स्वार्थ भाव से लड़े चौधरी टिकैत के प्रति नेताजी की इज्जत कई मौकों पर देखी गई। लखनऊ में कई बार चौधरी टिकैत की उनसे भेंट हुई।
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मुलायम सिंह की यादें
- फोटो : amar ujala
सिसौली में भी दो बार तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव आए थे। पहली बार 11 दिसंबर 1990 को भाकियू की बड़ी जनसभा हुई। जिसमें देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर, उप प्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल और मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव मौजूद रहे।
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मुलायम सिंह की यादें
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चौधरी टिकैत की ओर से उठाई गई अनेक मांगों को नेताजी ने स्वीकार किया। 1993 में 14 सितंबर को सिसौली में राजकीय कन्या इंटर कॉलेज के शिलान्यास का कार्यक्रम रखा गया। सीएम के तौर पर मुलायम सिंह यादव शामिल हुए और किसानों से सीधा संवाद किया।
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जिले से जुड़ी मुलायम की यादें।
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मुलायम सिंह का निधन किसानों के लिए बड़ी क्षति : नरेश टिकैत
भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने हमेशा गांव, किसान और मजदूरों के उत्थान के लिए कार्य किए। कई दशक तक प्रदेश की राजनीति में उनकी कामयाबी नेताजी की नेतृत्व क्षमताओं की गवाह है।
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मुलायम सिंह की यादें
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उन्होंने बताया कि समाज के हर वर्ग को आगे बढ़ाने में उनकी अहम भूमिका रही। उनका निधन किसानों के साथ ही प्रदेश और देश के लिए बड़ी क्षति है।