मुजफ्फरनगर के मिमलाना गांव में मकान की छत गिरने से लोहे के गार्डर के नीचे दबा परिवार मदद के लिए 45 मिनट तक तड़पता रहा। घायल हादसे के एक घंटे बाद जिला अस्पताल पहुंच पाए। बताया गया कि घटनास्थल की अस्पताल से दूरी मात्र पांच मिनट की है। उपचार में देरी से इस बीच दो बच्चों की मौत हो गई।
तस्वीरें: 45 मिनट तक मलबे के नीचे तड़पता रहा परिवार, समय पर नहीं मिली मदद, दो बच्चों ने तोड़ा दम
मिमलाना निवासी आस मोहम्मद शुक्रवार की रात अपने घर के दरवाजे पर जबकि, उसकी पत्नी सलमा अपने बेटे शानू (21), शोएब (14), जुनेद (10), बेटी सना (11) और कलसुम (5) के साथ कमरे में सोए हुए थे। रात में लगभग 1:55 बजे मकान गिर गया। लोहे का गार्डर बच्चों के ऊपर आकर गिरा। हादसे से घर में चीख-पुकार मच गई। आस मोहम्मद ने शोर मचाया तो मोहल्ले के लोग एकत्र हो गए। इस बीच किसी ने एसडीएम सदर परमानंद झा को सूचना दी।
उन्होंने एंबुलेंस मौके पर भिजवाई। वे खुद लगभग दो बजकर 45 मिनट पर घटनास्थल पर पहुंच गए। मलबे में दबे परिवार को बाहर निकाला गया और जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया। हादसे में शोएब और सना की मौत हो गई, जबकि परिवार के चार सदस्य अस्पताल में भर्ती है।
रामलीला टिल्ला से सटा मिमलाना गांव
मिमलाना गांव को शहर का हिस्सा ही कहा जा सकता है। यह शहर के रामलीला टिल्ला से सटा हुआ है। इस गांव में अभी भी बहुत से ऐसे घर हैं, जिनकी छत कच्ची है। रात में लगभग एक बजकर 55 मिनट पर इस गांव के आस मोहम्मद के मकान की छत गिरने से बड़ा हादसा हो गया। बारिश के शोर में परिवार के घायलों की चीख-पुकार पड़ोसियों को सुनाई नहीं दी। आस मोहम्मद के शोर मचाने पर पड़ोसी नियाजुद्दीन घर से बाहर निकला और मकान को गिरा देख सहम गया। उसने आस-पास के घरों का दरवाजा पीटा। कुछ लोग एकत्र हुए तो मलबा गिरने के बाद बंद गेट से अंदर जाने की जगह नहीं मिल पाई। घर में कितने लोग दबे हैं, यह भी किसी को नहीं पता था। शोर मचता गया लोग एकत्र होते गए।
लगभग दो बजकर 40 मिनट पर गेट तोड़ा गया और मलबे में दबे लोगों को एक-एक कर बाहर निकाला गया। परिवार के छह बच्चे और आस मोहम्मद और उसकी पत्नी इसमें दबे थे। इस बीच किसी ने एसडीएम सदर को सूचना दी, उनकी सूचना पर एंबुलेंस मौके पर पहुंची। कोतवाली पुलिस को लेकर एसडीएम सदर परमानंद झा दो बजकर 45 मिनट मौके पर पहुंच गए। नागरिकों की मदद से घायलों को एंबुलेंस से एक बजकर 55 मिनट पर अस्पताल पहुंचाया। हादसे को तब तक इतनी देर हो चुकी थी कि दो बच्चों 11 साल की शना और 16 साल के शोएब की मौत हो चुकी थी। मोहल्ले के नियाजुदीन का कहना है कि यदि लोग जल्दी जाग जाते और मलबा हटने में देरी नहीं होती तो इन बच्चों की जान भी बचाई जा सकती थी।