सिर पर टोपी हरी, हाथ में किसी के सफेद झंडा तो किसी के लाल और हरा। संगठन भी एक नहीं, बल्कि अनेक। कोई यूपी से तो कोई हरियाणा और पंजाब से। यहां तक कि पश्चिम बंगाल से भी लोग पहुंचे। हर प्रदेश के किसान अपनी संस्कृति के अनुरूप वेशभूषा में थे। पंचायत स्थल पर दूर तक यही नजारा था, जिससे भांति भांति के रंग के झंडों से पटा सैलाब नजर आ रहा था। बावजूद सबकी जुबां पर एक ही बात थी, कृषि कानूनों को वापस लो।
किसान महापंचायत: हालात बेकाबू, सिर पर टोपी... हाथ में झंडा, हर तरफ थी सिर्फ एक ही मांग
इसी तरह मध्य प्रदेश के सतना जिले से श्रीकांत द्विवेदी रामजीत रीवा आदि करीब 500 लोग पहुंचे, जिनका कहना था कि कृषि कानूनों के विरोध में सात माह से तहसील रामपुर में धरना दे रहे हैं। आज पूरे देश का किसान तीनों कानूनों के खिलाफ है, सरकार को किसानों की बात माननी होगी। क्रांतिकारी संगठन की सुखविंदर कौर ने बताया कि करीब 500 महिलाएं पटियाला से इस संगठन की आई हैं, जो हरा दुपट्टा ओढ़कर पहुंची। इस तरह से महापंचायत स्थल पर झंडे, कपड़ों और बैनर में रंगों का समावेश था, लेकिन मुद्दा सभी का एक था कि कृषि कानूनों को सरकार थोप रही है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।
कर्नाटक, तामिलनाडू और आंध्रप्रदेश से आई महिला किसान
कर्नाटक से आई महिला किसान रंजना स्वामी, बिंदु अमनी, अन्ना सुई अम्मा, नलनी आदि ने बताया कि तीन दिन पहले ट्रेन से हजारों किलोमीटर का सफर तय करके महापंचायत में भाग लेने के लिए आए हैं। यह किसानों के हकों की लड़ाई है, जिसमें हमारे प्रदेश के किसानों की शत प्रतिशत भागीदारी होगी। आंध्र प्रदेश से आई महिला किसान संगठन जिला अध्यक्ष चीतुरू, हेमलता ने कहा कि भाजपा सरकार किसानों का उत्पीड़न कर रही है। हर राज्य का किसान खुद को ठगा महसूस कर रहा है।
किसानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा
हरियाणा के हिसार से आए रोहताश सुंदर आदि ने अपने प्रदेश में किसानों पर किए गए लाठीचार्ज की निंदा की। कई किसान आंदोलन में अपने प्राणों की आहुति दे चुके हैं, यह बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।
लड़ाई पूंजीपतियों के खिलाफ
पंजाब आभोर जिलाध्यक्ष प्रगट सिंह महामंत्री जगत सिंह ने बताया कि यह लड़ाई पूंजीपतियों और भाजपा सरकार से है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दोस्तों के साथ देश के किसानों को तीन काले कानूनों के माध्यम से लूटकर पूंजीपतियों की तिजोरी भरने में लगे हैं।