मुजफ्फरनगर में पकड़े गए अंतर्राज्यीय नकली शराब बनाने के रैकट के भंडाफोड़ से करोड़ों नहीं अरबों रुपये के राजस्व के नुकसान का पता चला है। यह कारोबार बीते काफी समय से यूपी ही नहीं बल्कि सात अन्य राज्यों में चल रहा था।
शराब रैकेट का पर्दाफाश: करोड़ों के रैपर, ढक्कन से अरबों का कारोबार, 9 राज्यों में फैला था व्यापार
अवैध शराब के इस कारोबार के खुलासे ने कई राज्यों की पुलिस और इंफोर्समेंट एजेंसियों की पोल खोल दी है। विभिन्न ब्रांड के जो ढक्कन और रैपर पुलिस ने बरामद किए हैं उनकी कीमत ही लाखों में है। इसके अलावा तीन सौ रुपये प्रति बोतल के न्यूनतम दर से भी जोड़ा जाए तो यह कारोबार कम से कम 900 करोड़ रुपये का था।
जाहिर है इस खेल में सिर्फ चंद गाड़ियां, उनके ड्राइवर व कुछ बिचौलिए ही इस पूरे गैंग को संचालित कर रहे थे, यह संभव नहीं है। ऐसे में पुलिस भी यह मान कर चल रही है कि इसमें कुछ सफेदपोश भी शामिल हो सकते हैं।
नकली शराब तैयार कर शराब ठेकों व देहात क्षेत्रों में सप्लाई करने वाले रैकेट में शामिल आरोपियों का यह धंधा देशभर के 50 से अधिक जनपदों में नकली शराब बनाकर सप्लाई की जाती थी। इसके लिए जिस राज्य में जो ब्रांड चलता था, उसी ब्रांड की नकली शराब तैयार कर सप्लाई की जाती थी।
फिलहाल मुजफ्फरनगर पुलिस पूरा नेटवर्क खंगालने की कोशिश कर रही है। सूत्रों की मानें तो पकड़ा गया गैंग न सिर्फ नकली शराब को ब्रांडेड बनाकर बेचता था बल्कि महंगी ब्रांडेड शराब की बोतल में सस्ती शराब पैक कर बेचा जा रहा था।
एसएसपी अभिषेक यादव ने बताया कि नकली शराब रैकेट से जुड़े आरोपियों का धंधा उत्तर प्रदेश के साथ ही उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश समेत नौ राज्यों में फैला हुआ था। यूपी की बात करें तो जनपद सुल्तानपुर, गोरखपुर, गाजीपुर, कानपुर, अलीगढ़, बिजनौर, सहारनपुर आदि में नकली शराब सप्लाई की जा रही थी।
उदाहरण के तौर पर 100 पाइपर जिसकी कीमत यूपी में 1700 रुपये है उसके स्थान पर 8 पीएम या कोई अन्य ब्रांड की शराब उसी बोतल में भर कर बेचने से कम से कम 1000 से 1200 रुपये प्रति बोतल का सीधा मुनाफा शराब माफियाओं को पहुंच रहा है।