आंगन की किलकारी, चहक और महक होती हैं बेटियां। लेकिन इनमें हिम्मत है आंगन से आसमान तक छा जाने की। अमर उजाला ने अपराजिता-100 मिलयन स्माईलस कार्यक्रम के अंतर्गत एक अनूठी पहल की। कार्यस्थल पर बेटियां। इस अभियान के साथ प्रदेश भर के लोग जुड़े। मुरादाबाद मंडल में भी इस अभियान को खूब सराहा गया। पिता और माता अपनी बेटियों को अपने कार्यस्थल पर ले गए और उनके साथ सेल्फी ली। देखिए दहलीज से निकलकर दफ्तर तक के इस सफर को बेटियों ने कैसे जिया। देखिए खूबसूरत रिश्ते की ये अद्भुत तस्वीरें...।
बेटी जपदीप कौर के साथ पिता गुरदीप सिंह, शाहपुर रजहेड़ा, मंडी धनौरा, अमरोहा
सौम्या चंद्र अपने पिता सतीश चंद्र, पुलिस अधीक्षक यातायात, मुरादाबाद से उनके कार्यालय में यातायात के नियम समझती हुईं।
विरमा सिंह के पिता राजेंद्र सिंह सेंगर मुरादाबाद में एडीएम सिटी के पद पर तैनात हैं। उनकी कुर्सी पर बैठकर विरमा ने अपने आप को गौरवान्वित महसूस किया।
अमन उस्मानी, पिता शुजाउद्दीन उस्मानी के साथ, स्थान : सेंट अम्तुल पब्लिक स्कूल, संभल।
दिव्यांशी सहदेव, पिता : सुभाष सहदेव के साथ उनकी दुकान पर, बेगम सराय कलां, अमरोहा में। उनके पिता कहते हैं - जब मैं बेटी दिव्यांशी को करुणा के साथ देखता हूं तो मेरा दिल गर्व से भर जाता है। वह विनम्र तरीके से सबसे बात करती है। मैं चाहता हूं कि वह अपने पैरों पर खड़ी हो।